दवा विक्रेताओं के बाद अब खाद और कीटनाशक विक्रेता भी केंद्र सरकार के आदेश से संकट में आ गए हैं। सरकार ने लाइसेंस के लिए डिग्री-डिप्लोमा अनिवार्य कर दिया है।
देश में अब कोई भी व्यापारी किसानों को तब तक खाद और कीटनाशक दवा नहीं बेच पाएगा जब तक उसके पास बीएससी एग्रीकल्चर और बीएससी रसायन विज्ञान की डिग्री और डिप्लोमा न हो। के्रंद सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने ऐसे आदेश जारी किए हैं।
देश में लाखों छोटे-बड़े व्यापारी सालों से सरकारी लाइसेंस लेकर कारोबार कर रहे हैं। केंद्र सरकार के इस फैसले से कृषि व्यापार क्षेत्र में खलबली मच गई है। खाद एवं कीटनाशक दवा विक्रेता इस फैसले के विरोध में खड़े हो गए हैं।
कृषि विभाग के क्वालिटी कंट्रोलर आनंद कुमार ने बताया कि केंद्र सरकार ने अब पेस्टी और फर्टिलाइजर के लाइसेंस के लिए नए नियम लागू किए हैं। इसमें बीएससी एग्रीकल्चर या बीएससी रसायन विज्ञान का एक सब्जेक्ट अनिवार्य होगा। अब नए लाइसेंस योग्यता वालों को ही दिए जाएंगे।
जिले के 80 दुकानदारों पर लटकी तलवार
जिले में खाद और कीटनाशक दवा बेचने की करीब 80 से 85 दुकानें हैं। सरकार के फैसले के बाद इन दुकानदारों पर दुकाने बंद करने की तलवार लटकी हुई है। इन दुकानदारों को या तो दो साल में डिग्री या डिप्लोमा विभाग के पास जमा कराना होगा, नहीं तो इनकी दुकानें बंद कर दी जाएंगी। केंद्र सरकार के आदेश के मुताबिक मौजूदा लाइसेंस व्यापारी ने दो वर्षों में उक्त उपाधियां नहीं लीं तो उनके लाइसेंस निरस्त कर दिए जाएंगे।
ऐसा हुआ तो नहीं हो पाएगी उधार की रिकवरी
केंद्र सरकार के निर्णय से जहां कारोबार प्रभावित होगा, वहीं किसानों से उधारी वसूली में भी व्यापारियों को परेशानी झेलनी पड़ेगी। देश में जितने खाद एवं कीटनाशक दवा व्यापारी हैं, उतने कृषि स्नातक या रसायन विज्ञान के डिप्लोमाधारी बेरोजगार हैं ही नहीं । जिले में करीब 80- 85 व्यापारी लाइसेंस लेकर करोबार चलाते हैं। इनसे जुड़े और सैकड़ों छोटे व्यापारी दुकानें चला रहे हैं। लाइसेंस लेने का यह नियम वापस नहीं लिया दुकानदारों को दुकान चलाने के लिए काफी परेशानी होने वाली हैं।