पिछले दिनों दिल्ली वालों को कोरोना के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों की सरकारों की नासमझी के कारण भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कभी उत्तर प्रदेश ने अपनी नोएडा-गाजियाबाद की सीमा दिल्ली वालों के लिए बंद कर दी, तो कभी हरियाणा ने अपना बॉर्डर सील कर दिया।
दरअसल, हरियाणा और उत्तर प्रदेश ने समय-समय पर यह कहते हुए अपनी सीमाएं सील करने की कोशिश की थी कि उनके यहां कोरोना संक्रमण का मुख्य कारण दिल्ली से संक्रमित लोगों की आवाजाही है।
हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने इसे लेकर गंभीर बयान दिया था और कहा था कि दिल्ली में काम करने वाले लोगों को अपने लिए दिल्ली में ही रहने का इंतजाम कर लेना चाहिए।
दिल्ली के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के अनुरोध के बाद भी हरियाणा ने अपनी सीमाएं खोलने से इनकार कर दिया था।
स्वयं दिल्ली ने भी एक बार अपनी सीमा यह कहते हुए बंद कर दी कि लोगों की आवाजाही के कारण दिल्ली में स्थिति बिगड़ रही है।
हालांकि, लोगों की आपत्ति को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह सील एक हफ्ते के पहले ही खोल दी थी।
जानकारी के मुताबिक अमित शाह ने बैठक में सभी अधिकारियों को यह बताया कि कोरोना संक्रमण के लिहाज से भी दिल्ली-एनसीआर को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता।
इसे एक यूनिट मानकर ही देखा जाना चाहिए और कोरोना के नियंत्रण के उपाय तभी सफल होंगे जब लोगों की आवाजाही को ध्यान में रखकर नीतियों को बनाया और लागू किया जायेगा।
माना जा रहा है कि इसे देखते हुए जल्दी ही कुछ नए निर्देश भी जारी किए जा सकते हैं।
वहीं, दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, मुख्य सचिव विजय देव और अन्य शीर्ष अधिकारियों की भी बैठक हुई।