जमीन पर कब्जा करने या किसी का कब्जा हटाने के मामले में अब पुलिस और राजस्व विभाग के कर्मचारियों का कोई इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। शासन ने इसे रोकने के लिए आदेश जारी किया है।
बिना न्यायालय के आदेश के किसी की जमीन पर कब्जा कराने या हटवाने वाले पुलिस और राजस्व विभाग के कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। भूमाफिया और कॉलोनाइजरों द्वारा निजी जमीनों पर कब्जा करने या दूसरे के कब्जे हटाने के लिए राजस्व विभाग के लेखपाल और दरोगा का इस्तेमाल किया जाता रहा है।
तहसील दिवस और जन सुनवाई के दौरान फरियादियों द्वारा लेखपाल और पुलिस के दरोगाओं के खिलाफ भी दूसरे के पक्ष में एकतरफा कार्रवाई कर जमीनों पर कब्जा कराने की शिकायतें होती रही है।
इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए गत दिनों प्रमुख सचिव ने एक शासनादेश जारी किया, जिसमें किसी भी व्यक्ति की निजी जमीन पर कब्जा कराने, किसी का कब्जा हटाने के लिए अपनी मर्जी से कोई भी राजस्व विभाग का कर्मचारी या अधिकारी, पुलिस का कोई दरोगा या सिपाही नहीं जाएगा।
अगर कोई कर्मचारी आदेश की अवहेलना करता है और किसी की जमीन पर कब्जा कराने में उसकी भूमिका होने का पता चलता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जमीन के मामले में केवल किसी न्यायालय के आदेश के बाद ही संबंधित व्यक्ति को पुलिस बल दिया जाएगा।
तहसील के राजस्व विभाग के कर्मचारियों को जरूरत के मुताबिक जमीन की नाप करने के लिए भेजा जाएगा। अपर जिलाधिकारी (वित्त एव राजस्व) केशव कुमार का कहना है कि शासनादेश के बाद अब कोई भी राजस्व विभाग का कर्मचारी और पुलिसकर्मी किसी की निजी जमीन पर कब्जा करने या हटाने के लिए बिना न्यायालय के आदेश के मौके पर नहीं जाएगा।