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अब झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ होगा FIR

Sat, 01 Mar 2014 02:18 PM IST
पवन कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली
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राजधानी में अब फर्जी और गैर पंजीकृत चिकित्सकों की खैर नहीं। अभी तक नियम-कानून के अभाव में दिल्ली मेडिकल काउंसिल (डीएमसी) की शिकायत के बावजूद पुलिस कार्रवाई करने में टालमटोल करती थी।
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लेकिन अब डीएमसी की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस को झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करना होगा। इस संबंध में पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) हरेंद्र के. सिंह की ओर से जारी आदेश के बारे में सभी थाना प्रभारी को सूचित कर दिया गया है।

जारी आदेश में फर्जी चिकित्सकों की जांच-पड़ताल का जिम्मा बीट स्टाफ और डिवीजन पर होगा। एसएचओ के माध्यम से बीट स्टाफ से कहा गया है कि उनके क्षेत्र में जो भी क्लीनिक चल रहे हैं, वहां यह सुनिश्चित किया जाए कि चिकित्सकों ने डीएमसी या मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की ओर से जारी पंजीकरण संख्या लिखी है या नहीं।
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दवा के पर्चे, मरीजों को दिए जाने वाले प्रमाण-पत्र और फीस की रसीद पर भी पंजीकरण संख्या होनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया जा रहा है तो बीट स्टाफ की जिम्मेदारी है कि वह इसकी विस्तृत जानकारी थाने और डीएमसी को दे। रिपोर्ट के आधार पर जांच कर दिल्ली मेडिकल काउंसिल तीन दिन में अपनी रिपोर्ट पुलिस को सौंप देगी।

यदि डीएमसी अपनी रिपोर्ट में कहती है कि डॉक्टर फर्जी है और इस पर कार्रवाई की जानी चाहिए तो पुलिस को उसके खिलाफ फौरन प्राथमिकी दर्ज करनी होगी। दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष की कैद और 20 हजार रुपये जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।

इस अपराध को गैर जमानती बताया गया है, लिहाजा पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने के बाद आरोपी को गिरफ्तार करना होगा। दिल्ली मेडिकल काउंसिल की एंटी क्वेकरी सेल के चेयरमैन डॉ. अनिल बंसल ने कहा कि दिल्ली में करीब 40 हजार फर्जी डॉक्टर हैं, जो मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं।
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