ईंट, रोड़ी और डस्ट को रिसाइकल कर प्रदेश में पहली बार पुराने मकानों के मलबे से मकान तैयार किए जाएंगे। विदेशों की तर्ज पर प्रदेश में पहली बार आवास विकास परिषद नई तकनीक उपयोग कर सस्ते मकान बनाने की तैयारी में है।
आगामी बोर्ड बैठक में परिषद के इंजीनियर्स नई तकनीक के उपयोग का प्रस्ताव रखेंगे, जिसके बाद मलबे से नए मकान बनाने का रास्ता साफ हो जाएगा।
परिषद अधिकारियों का कहना है कि संसाधनों का नवीनीकरण न होने के चलते कंक्रीट और डस्ट की कमी होने लगी है। ऐसे में परिषद ने नवीनीकरण तकनीक का उपयोग अपनी योजनाओं में करने का निर्णय किया है।
परिषद के अधीक्षण अभियंता अरुण कुमार ने बताया कि पिछले दिनों हुए एक सेमिनार में यह चर्चा की गई है कि किस तरह से मलबे का उपयोग नया मकान बनाने में किया जा सकता है।
इसके लिए कुछ नई मशीनों का उपयोग होगा। जिसके बाद टूटी इमारत का मलबा नई बिल्डिंग बनाने में प्रयोग हो सकेगा।
आगामी बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को रखा जाएगा। जिससे सिद्धार्थ विहार और अजंतापुरम योजनाओं में इसका प्रयोग किया जा सके।
सस्ते हो सकते हैं मकान
ईंट, रेत और डस्ट की कीमत लगातार बढ़ती जा रही हैं। इससे मकान की लागत में भी वृद्धि हुई है। अगर मलबा रिसाइकल होता है, तो मकानों की कीमतें कम की जा सकती हैं। हालांकि नई तकनीक पर खर्च बढ़ेगा, मगर फिर भी वह सस्ता होगा।
यूं उपयोग होगा मलबा
ईंट और सीमेंट के मलबे को मशीन में तोड़कर महीन कंक्रीट के रूप में बनाया जाएगा। इसके बाद इसे मकान निर्माण में उपयोग किया जा सके। कंक्रीट में सीमेंट मिलाकर इसे मसाले के रूप में निर्माण में उपयोग किया जाएगा।