डॉक्टरों के खिलाफ देश में बढ़ती हिंसात्मक घटनाओं के खिलाफ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सख्त कानून तैयार कर लिए हैं। हेल्थकेयर सर्विस पर्सनल एंड क्लिनिकल एस्टेबलिस्मेंट एक्ट (प्रोबीजन ऑफ वायलेंस एंड डेमेज प्रॉपर्टी) 2019 का ड्राफ्ट तैयार किया है। इसके तहत डॉक्टर, नर्स, स्वास्थ्य कर्मचारी, एंबुलेंस कर्मचारी या किसी भी तरह के अस्पताल पर हमला होने की स्थिति में आरोपी के खिलाफ सख्त धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज होगा।
इसमें अधिकतम 10 वर्ष की जेल और 10 लाख रुपये का जुर्माना लग सकता है। अगर कोई आरोपी जुर्माने की राशि नहीं देता है तो उसकी संपत्ति को बेच जुर्माने की भरपाई की जाएगी। अगले 30 दिन के भीतर मंत्रालय ने इस कानून पर आपत्ति एवं सुझाव मांगे हैं। इसके बाद मंत्रालय अंतिम ड्राफ्ट को तैयार इसे लागू करने की दिशा में काम करेगा।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि क्लिनिकल एस्टेबलिस्मेंट अधिनियम पहले से ही कई राज्यों में लागू है, जिसके तहत डॉक्टर या अस्पताल संपत्ति को नुकसान पहुंचाना अपराध की श्रेणी में आता है। हालांकि पिछले काफी समय से लगातार सामने आ रही घटनाओं के चलते मंत्रालय ने अब कानून में फेरबदल कर इसे नया रूप दिया है।
इस कानून के तहत करीब तीन से चार तरह के सजा के प्रावधान किए हैं। अगर किसी अस्पताल, नर्सिंग होम या क्लीनिक की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है तो उसके लिए 6 माह से 5 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। साथ ही 50 हजार से 5 लाख रुपये का जुर्माना भी है। इसके अलावा भारतीय दंड संहिता 320 धारा के तहत किसी भी स्वास्थ्य कर्मचारी, नर्स, डॉक्टर और एंबुलेंस चालक पर घातक हमले करने पर 10 वर्ष की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। सरकार ने इस कानून में सभी तरह के स्वास्थ्य कर्मचारियों को शामिल किया है।
दरअसल हाल ही में पश्चिम बंगाल के मेडिकल कॉलेज में दो जूनियर रेजीडेंट डॉक्टरों पर हमला होने के बाद पूरे देश में डॉक्टरों ने विरोध शुरू कर दिया था। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से लेकर तमाम राज्यों में करीब चार दिन तक डॉक्टर हड़ताल पर रहे।
वहीं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) भी लगातार इसके खिलाफ प्रदर्शन कर रहा है। राजधानी दिल्ली की बात करें तो इस साल जनवरी से लेकर अब तक करीब 14 मामले सामने आ चुके हैं। ये सभी मामले दिल्ली व केंद्र सरकार के अस्पतालों से जुड़े हैं। इनमें डॉक्टरों से मारपीट के बाद हड़ताल हुई और मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।