मिर्जापुर और मथुरा के फूड पार्क को बीते साल दिसंबर में, जबकि बाबा रामदेव की कंपनी को इस साल जनवरी में सरकार की तरफ से सैद्धांतिक मंजूरी दी गई थी।
अधिकारी ने कहा कंपनियों को अपना पक्ष रखने के लिए नियमानुसार समय दिया गया है और यदि इनके जवाब से मंत्रालय संतुष्ट नहीं होता है, तो जुलाई में इनका अप्रूवल रद्द कर दिया जाएगा।
वहीं इससे पहले मंगलवार को पतंजलि के आचार्य बालकृष्ण ने ट्वीट कर प्रोजेक्ट कहीं और ले जाने की बात कह दी थी, लेकिन देर रात मुख्यमंत्री आदित्यनाथ और योग गुरु बाबा रामदेव के बीच बात हो गई और प्रोजेक्ट कहीं और जाने से बच गया।
यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में बन रहे पतंजलि उद्योग के मेगा फूड पार्क प्रोजेक्ट को अगर किसी और राज्य में ले जाया जाता तो इससे क्षेत्र में 85 हजार लोगों को रोजगार मिलने का सपना भी टूट जाता।
सूत्रों के अनुसार, इससे पहले अधिकारियों को यही उम्मीद थी कि कि इस साल के अंत तक प्रोजेक्ट में उत्पादन शुरू हो जाएगा। इसके रद्द होने से यमुना प्राधिकरण की छवि भी खराब होती और औद्योगिक माहौल भी बिगड़ता।
समाजवादी पार्टी की सरकार ने नवंबर 2016 में यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में पतंजलि उद्योग को करीब 455 एकड़ जमीन आवंटित की थी। सेक्टर 24 व 24ए में औद्योगिक भूखंड दिया गया है, जबकि सेक्टर-22ई में संस्थागत भूखंड आवंटित किया गया है।
इसके एवज में करीब 10 फीसदी रकम जमा कर काम भी शुरू हो गया था। हालांकि, पेड़ काटने का विवाद हाईकोर्ट जाने पर कुछ समय तक काम रुका रहा। फिलहाल बाउंड्री वॉल बन चुकी है। अभी परिसर में काम चल रहा है।
इसमें 10 हजार रोजगार प्रत्यक्ष व 75 हजार रोजगार अप्रत्यक्ष मिलने का दावा है जो इसके रद्द होने से अटक जाते। इधर, इस मसले पर यमुना प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह का कहना है कि जमीन का आवंटन प्राधिकरण व प्रदेश सरकार से हुआ है तो रद्द भी यहीं से होगा।
हमारी तरफ से कोई आवंटन रद्द नहीं हुआ है। प्रदेश सरकार की औद्योगिक नीति के तहत छूट देते हुए आवंटन किया गया था। अब अगर भारत सरकार से किसी तरह का निर्देश प्राप्त होता है तो उस पर भी अमल किया जाएगा। बहरहाल देर रात सरकार के प्रयासों से संकट टल गया।
यीडा को दी थी इतनी जमीन
पतंजलि ग्रामोद्योग 25-30 एकड़
दिव्य फार्मेसी 50-60 एकड़
पतंजलि आयुर्वेद 125-150 एकड़
ट्रस्ट, महाविद्यालय व आवास 125-150 एकड़
आचार्य कुलम 60 एकड़