फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

CISF भर्ती में ज्वॉइन करने में 3 साल लेट हो गई मुस्लिम महिला, अब हाई कोर्ट ने दिया ये आदेश

Wed, 06 Jun 2018 10:13 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
muslim women
विज्ञापन
अल्पसंख्यक समुदाय की एक युवती का चयन सीआईएसएफ के लिया हुआ। लेकिन ज्वॉइनिंग से ठीक पहले उसके टखना में चोट लग गई। जिससे उसकी ज्वॉइनिंग नहीं हो गई। 3 साल बाद कोर्ट ने उसके हक में फैसला सुनाकर उसे फोर्स ज्वॉइन करने इजाजत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि लड़की ने अपने समुदाय का नाम रोशन किया है, इससे हर महिला को प्रेरणा मिलेगी।
विज्ञापन


जज हिमा कोहली और प्रतिभा रानी की बेंच ने सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्यॉरिटी फोर्सेस को आदेश दिया है कि 2015 के सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स एग्जाम (CAPF)के टॉपरों में से एक नूर फातिमा को फोर्स ज्वॉइन कराई जाए। फातिमा कुछ गंभीर चोट की वजह से ज्वॉइनिंग के समय बेड रेस्ट पर थीं। 

बताया जा रहा है कि फातिमा के परिवारवाले चाहते हैं कि वह शादी करके अपना घर बसा लें। न कि फातिमा बाहर निकलकर काम करे। जब फातिमा अपने चोटों से उभरी तब तक ज्वॉइनिंग की आखिरी तारीख खत्म हो गई थी। जिसके कारण सीआईएसएफ ने उन्हें भर्ती नहीं किया, इसके बाद उन्होंने कोर्ट का रुख किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

cisf - फोटो : अमर उजाला
मामले की सुनवाई करते हुए बेंच ने कहा कि हमें लगता है कि इस केस में हमारा दखल सही है क्योंकि याचिकाकर्ता को जो नुकसान हुआ, उसे उम्रभर नहीं भरा जा सकता था।याचिकाकर्ता को फोर्स में ज्वॉइनिंग दी जाती है तो वह महिलाओं और समुदाय के लिए उदाहरण साबित होंगी।

कोर्ट ने अपने जांच में पाया कि याचिकाकर्ता यूपी के जालौन जिले की रहने वाली है। वह एक युवा मुस्लिम हैं और एक कट्टरपंथी परिवार से ताल्लुक रखती है। सीआईएसएफ ज्वॉइन करने के लिए फातिमा ने कड़ी मेहनत की थी।

फातिमा ने अपने याचिका में बताया था कि सपने को पूरे करने में परिवार ने कोई भूमिका नहीं निभाई है। उन्होंने थोड़ा बहुत भी सपॉर्ट नहीं किया है। जॉइनिंग के महज 10 दिन पहले फातिमा का टखना चोटिल हो गया और डॉक्टरों ने 3 हफ्ते का बेड रेस्ट करने के लिए कहा। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें