पुलिस के हाईटेक होने के साथ सट्टेबाज भी हाईटेक हो गए हैं। आईपीएल सीजन-10 को शुरू हुए एक माह हो गया है लेकिन शहर की पुलिस अभी तक एक भी सट्टेबाज को नहीं पकड़ सकी है।
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पुलिस से बचने के लिए बुकी अब वीडियों कॉलिंग के जरिए मैच पर सट्टा लगा रहे हैं। बुकियों द्वारा यह प्रयास पहली बार प्रयोग में लाया गया है जो उनके लिए काफी मददगार साबित हो रहा है।
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आश्चर्य की बात यह है कि पुलिस अधिकारियों को सट्टेबाजों द्वारा प्रयोग किए जा रहे हाईटेक सॉफ्टवेयर और वीडियो कॉलिग के बारे में जानकारी नही है। पुतिलस अभी भी मुखबिर आधार पर सट्टेबाजों को पकडने की बात कर रही है।
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कैसे लग रहा है सट्टा
बुकियों ने फे सबुक,व्हाट्सअप और नया एप बनाकर वीडियों कॉलिंग के जरिए सट्टा लगाना शुरू कर दिया है। इसमें बुकी अपनी आईडी बनाकर ग्रुप बनाता है। जिस ग्रुप में 500 से ज्यादा पंटरों को साथ जोड़ कर मैच का बॉल दर बॉल रेट बताता है। जिसके बाद सट्टा लगाने वाले पंटर वीडियो कॉलिग में मेसेज कर पैसों की हां और ना बोलते हैं। इसके जरिए बुकी को न तो अकांउट मेंटेन करने की जरूरत है और न ही पंटरों की रिकॉडिग करने की। वहीं बुकी को न ही ज्यादा फोन कनेक्शन लेने की जरूरत भी नही है और न ही बार-बार फोन पर रेट बताने की।
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आईपीएल
- फोटो : Sportswallah
पहले कैसे लगता था सट्टा
इससे पहले बुकी अपने पास 10 से 12 फोन कनेक्शन रखता था। उसके बाद सट्टा लगाने वाले पंटरों की रिकॉर्डिंग रखनी पड़ती थी। इसके साथ अलग से लैपटॉप या रजिस्टर में सट्टा लगाने वाले पंटर का पूरा हिसाब रखना पड़ता था और मैच के दौरान बुकी को पांच सौ से ज्यादा फोन को रिसीव करना पड़ता था।
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- फोटो : अमर उजाला
एक माह में पकडे थे 100 सट्टेबाज
शहर मे सट्टेबाजों का गढ़ कोतवाली थाना क्षेत्र माना जाता है। कोतवाली थाने के नए एसएचओ सुरेश भड़ाना ने आते ही एक माह पहले एक सप्ताह में सट्टेबाजों के खिलाफ 39 मुकदमे दर्ज कर सौ से ज्यादा सट्टेबाजों को गिरफ्तार किया था। पुलिस से बचने के लिए सट्टेबाजों ने नया तरीका अपनाया है।
पुलिस को नही है जानकारी
सट्टेबाजों के लिए सख्त कानून नही है। इसलिए वह जल्दी छूट जाते है। सट्टेबाजों को कई बार अरेस्ट कर चुके है। पुलिस इस तरह के प्रयोग करने वाले सट्टेबाजों को पकडने में सक्षम है। जल्द ही कारवाई की जाएगी।-राजेश चेची, एसीपी क्राइम