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अगर यही हाल रहा तो नहीं बचेगा एक भी मोर

Tue, 16 Sep 2014 09:17 AM IST
दीपाली श्रीवास्तव/अमर उजाला, फरीदाबाद
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औद्योगिक शहर राष्ट्रीय पक्षी मोरों के लिए काल बन गया है। फरीदाबाद रेंज में पिछले तीन वर्ष में 177 मोर रानीखेत नामक बीमारी की चपेट में आए। इनमें इलाज मिलने में हुई देरी के कारण 17 ने अपनी जान गंवा दी। जो बच गए हैं उन्हें लकवा मार गया है।
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लाइलाज बीमारी से मोरों की असमय मौत से अन्य पक्षियों के तरह आने वाले समय में मोरों की संख्या भी कम होने का खतरा बना है। वन्य प्राणी विभाग के लिए भी इस बीमारी से निपटना बड़ी चुनौती बन गया है।

हर वर्ष आ रहे रानीखेत के मामलों को देखकर वन्य प्राणी विभाग ने विशेषज्ञों की सलाह पर इन्हें बचाने की मुहिम शुरू की है। प्रभावित क्षेत्रों में जागरूकता के साथ ही दवायुक्त पानी के बर्तन रखने का काम किया जाएगा। जिससे प्रकृति के इस खूबसूरत पक्षी को बचाया जा सके।
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बर्ड फ्लू की तरह ही है लाइलाज बीमारी
मोरों में तेजी से फैल रही रानीखेत बीमारी बर्ड फ्लू की ही तरह लाइलाज है। इसमें मोरों की आंख सूज जाती है और शरीर पैरलाइज हो जाता है। रानीखेत की चपेट में आने पर दिल्ली स्थित संजय गांधी अस्पताल में इनका इलाज किया जाता है।

इससे होती है बीमारी
तालाब और जोहड़ों के सूखने पर मोरों को प्यास बुझाने के लिए पानी नहीं मिलता। गर्मी में पानी की कमी मोरों में इस लाइलाज बीमारी दे रही है।

30 गांवों में रखे जाएंगे पानी से भरे बर्तन
तीन वर्ष से मोरों पर आए संकट से उन्हें बचाने के लिए वन्य प्राणी विभाग ने प्रभावित गांवों में जागरूकता अभियान शुरू कर दिया है। वाइल्ड लाइफ इंस्पेक्टर डेल चंद ने बताया कि फरीदाबाद और पलवल के 30 गांव में पानी में पोटैमैशियम परमैगनेट दवा मिलाकर बर्तन रखने के लिए भेजे गए हैं। इससे इस बीमारी का खतरा कम रहता है।

करीब 30 हजार मोरों पर खतरा
रानीखेत बीमारी से फरीदाबाद के करीब 30 हजार मोरों के जीवन पर संकट मंडरा रहा है। विशेषज्ञों की माने तो जल्द इस बीमारी पर नियंत्रण नहीं किया गया तो बहुतायत में पाए जाने वाले मोर भी अन्य प्रजातियों की तरह यहां से खत्म हो जाएंगे। वन्य प्राणी विभाग के अनुसार यहां का मौसम अनुकूल होने के कारण फरीदाबाद में मोरों की संख्या अधिक है।
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वर्ष--------बीमार---मरे
2012-13----100------10
2013-14----55-------04
2014-15----22-------03
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