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यीडा ने आठ बिल्डरों के 9 प्लॉट आवंटन किए निरस्त

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ग्रेटर नोएडा। यमुना प्राधिकरण ने बृहस्पतिवार को ग्रुप हाउसिंग के अंतर्गत आठ बिल्डरों के 9 प्लॉट आवंटन निरस्त कर दिए। इन बिल्डर ने लीज डीड की शर्तों का पालन नहीं किया था। इनमें से कुछ पर डिफॉल्टर होने और तय समय में नक्शा पास नहीं कराने का भी आरोप है। लिहाजा, लीज डीड कैंसल कर यीडा अब करीब 2.18 लाख वर्गमीटर पर दोबारा कब्जा लेगा। प्राधिकरण ने इन बिल्डरों की करीब 27 करोड़ की रकम भी जब्त कर ली है।
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अधिकारियों ने बताया कि सेक्टर-22डी के आठ बिल्डर प्लॉट निरस्त किए गए हैं। इसमें यूजी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के 10103.02 वर्गमीटर का प्लॉट निरस्त हुआ है, जबकि 1.18 करोड़ रुपये जब्त किए गए हैं। इसी तरह से ट्रिवेली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के 11610 वर्गमीटर का प्लॉट व 1.36 करोड़ रुपये, सनव्हाइट इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड के 11253.81 वर्गमीटर का प्लॉट व 1.32 करोड़ रुपये, प्रथम रियलवेंचर प्राइवेट लिमिटेड के 11610 वर्गमीटर का प्लॉट और 1.36 करोड़ रुपये, ग्रोथ इंफ्राडेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड की 18440.934 वर्गमीटर जमीन और 2.16 करोड़ रुपये, अजय रियल्कन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के 26310.458 और 18130.05 वर्गमीटर के दो प्लॉट के साथ 3.11 व 2.14 करोड़, स्टारसिटी इंफ्राडेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के 28783.029 वर्गमीटर का प्लॉट और 3.41 करोड़ रुपये के अलावा सेक्टर-22ए के ओमनिस डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के 82386 वर्गमीटर का प्लॉट निरस्त किया गया है व 11.21 करोड़ रुपये यमुना प्राधिकरण ने जब्त किए हैं। कुल 2.18 लाख वर्गमीटर के प्लॉट निरस्त किए गए हैं और 27.30 करोड़ रुपये की राशि जब्त की गई है।
लॉजिक्स बिल्डर ने कई को बेचे प्लॉट
जिन बिल्डर के प्लॉट आवंटन निरस्त किए गए हैं, उनमें अधिकांश के आवंटन लॉजिक्स बिल्डर को किए गए थे। लॉजिक्स ने इन बिल्डरों को आवंटित प्लॉट के टुकड़े कर बेच दिए, लेकिन यह बिल्डर काम नहीं कर पाए और आखिरकार डिफॉल्टर बिल्डर की श्रेणी में आने से इनके प्लॉट का आवंटन निरस्त हो गया।
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प्लॉट सब डिवीजन का खेल काफी पुराना
प्राधिकरणों के ग्रुप हाउसिंग विभाग की ओर से बिल्डरों को आवंटित जमीन के टुकड़े कर यानी प्लॉट के सब डिवीजन कर बेचने का खेल काफी पुराना है। नोएडा की स्पोर्ट्स सिटी में भी इस तरह की कारगुजारी अंजाम दी गई थी। इससे पूरा प्रोजेक्ट ध्वस्त हो गया। मुख्य बिल्डर जमीन आवंटन कराने के बाद दूसरे को जमीन बेच देता है और फायदा कमाकर निकल जाता है। दूसरे बिल्डर बीच मझधार में फंसकर रह जाते हैं। प्राधिकरणों की योजनाएं भी अटक जाती हैं। इन मामलों में भी कुछ ऐसा ही हुआ है।
रिशेड्यूलमेंट के बाद भी नहीं जमा किया बकाया
बिल्डरों ने जमीन आवंटन के बाद किस्त जमा करने के लिए रिशेड्यूलमेंट की मांग की यानी उनकी किस्तों को दोबारा से तय किया गया, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने बकाया जमा नहीं कराया और डिफॉल्टर की श्रेणी में आ गए। ऐसे में प्राधिकरण ने कार्रवाई कर दी।
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