सुविधाओं के अभाव में शहर के पहलवान हो रहे चित
- दूसरे शहरों का कर रहे रुख, खराब मैट पर अभ्यास करने से आए दिन हो रहे थे चोटिल
संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। जनपद से निकलकर देश और विदेश में अपना और जनपद का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों की पूरी फौज है। नोएडा शहर में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन सुविधाओं के अभाव में कुश्ती दम तोड़ रही है। अपनी प्रतिभा को उभारने के लिए खिलाड़ी शहर से बाहर अब दिल्ली, हरियाणा व हिमाचल का रुख कर रहे हैं। इसके अलावा कुछ महिला खिलाड़ी तो ऐसी भी हैं जिनका कुश्ती से ही मोह भंग भी हो रहा है।
महिला खिलाड़ियों का कहना हैं कि घरवालों को तो जैसे-तैसे राजी किया है, उसमें भी सुविधाओं के न होने से अच्छे परिणाम सामने नहीं आ रहे है। सूरजपुर स्थित मलकपुर स्पोर्ट्स स्टेडियम में कुश्ती की असुविधाओं की वजह से अभ्यास करने वाले खिलाड़ी आए दिन चोटिल हो रहे थे। इसकी वजह से मजबूरी में खिलाड़ियों को अपना शहर छोड़ना पड़ा। खिलाड़ियों का कहना हैं कि स्टेडियम में मैट व अन्य उपकरणों की भी सुविधा पूरी नहीं है। पुराना मैट होने की वजह से आए दिन चोट लग रही थी। इसके अलावा ज्यादा देर तक स्टेडियम में अभ्यास भी नहीं करने दिया जाता था।
अभ्यास के लिए नहीं थी सुविधा
सूरजपुर निवासी 17 वर्षीय विपिन अंडर-15 में नेशनल तक पहुंच चुके हैं। उनका कहना है कि वह अपने शहर सूरजपुर स्थित मलकपुर स्पोर्ट्स स्टेडियम में कुश्ती का अभ्यास करते थे। लेकिन वहां मैट व अन्य सुविधाएं न होने की वजह से परेशानियों का सामना करना पड़ता था। मैट पुराना और अच्छा न होने की वजह से आए दिन चोट लगती थी। इस वजह से अभ्यास में बाधा आती थी। बार-बार चोट लगने की वजह से भविष्य में कुश्ती खेलने में दिक्कत न आए, इस कारण से अपना शहर छोड़ हरियाणा आना पड़ा। उन्होंने कहा कि खेल अधिकारियों ने भी कभी भी खिलाड़ियों को सुविधा देने के बारे में नहीं सोचा।
आए दिन लगती थी चोट
जेवर निवासी काजल नेशनल तक खेल चुकी है। उन्होंने बताया कि दो महीने से वह अभ्यास नहीं कर पा रही हैं। वह मलकपुर स्पोर्ट्स स्टेडियम में अभ्यास करती थीं। लेकिन, अब वह अभ्यास के लिए दूसरी अकादमी की तलाश कर रही हैं। इसका कारण यह है कि स्टेडियम में कुश्ती अभ्यास कराने के नाम पर एक मैट है। वह भी बहुत पुराना, उसमें गैप होने के कारण आए दिन खिलाड़ी चोटिल होते थे। ऐसे में कैसे अभ्यास होगा। उन्होंने कहा कि अगर ऐसे ही आए दिन चोट लगती रहीं तो आगे बेहतर प्रदर्शन कैसे कर पाएंगे। इसलिए स्टेडियम में जाना छोड़ दिया।
शहर में नहीं थी सुविधाएं
सरफाबाद के रहने वाले आसमान यादव ने बताया कि वह पहले अपने शहर में ही कुश्ती का अभ्यास करते थे, लेकिन शहर में वो कुश्ती की सुविधाएं नहीं हैं जो एक अच्छे खिलाड़ी के लिए होनी चाहिए। स्पोर्ट्स स्टेडियम में भी कुश्ती का बढ़ावा देने के लिए कोई सुविधा नहीं हैं। वहां का हाल ऐसा है कि सुविधाओं के नाम पर वहां कुछ भी नहीं है। इसलिए मजबूरी में अपना शहर छोड़ कर हिमाचल आना पड़ा। अब यहां कुश्ती अभ्यास के लिए अच्छी सुविधाएं हैं और अभ्यास भी मन लगाकर कर रहे हैं तो उम्मीद है कि ओलंपिक पर दाब लगाएंगे और देश का नाम रोशन करेंगे।
हर माह 15 से 20 हजार रुपये अधिक हो रहा खर्चा
शहर के कुश्ती खिलाड़ियों और कोच का कहना हैं कि अगर शहर के स्टेडियमों में कुश्ती खिलाड़ियों को सुविधाएं मिले तो युवा और भी अच्छा प्रदर्शन कर अपने शहर और देश का नाम रोशन कर सकते हैं। कई खिलाड़ी ऐसे हैं जो कुश्ती अभ्यास के लिए पैसों के अभाव में बाहर नहीं जा सकते हैं और उन्हें शहर में सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। वहीं, शहर से बाहर, दिल्ली, हरियाणा आदि जगहाें पर जाने वाले खिलाड़ियों का कहना है कि दूसरे शहर में जाने से हर माह 15 से 20 हजार रुपये का खर्चा अधिक हो रहा है।
वर्जन
खिलाड़ियों की बात में नहीं है सच्चाई
खिलाड़ियों द्वारा कहीं गई बातों में कोई सच्चाई नहीं है। खिलाड़ी अपने मन से स्टेडियम में अभ्यास के लिए नहीं आ रहे हैं और अन्य राज्यों का रुख कर रहे हैं। स्टेडियम में कुश्ती खिलाड़ियों को सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। जो यह बोल रहे हैं वह मलकपुर स्टेडियम में आने वाले खिलाड़ी नहीं हैं। कुछ लोग हैं जो यह अफवाह फैला रहे हैं कि मलिकपुर स्टेडियम में कुश्ती खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं नहीं हैं। -अनीता नागर, जिला क्रीड़ाधिकारी