रानियां। जिले में 20 दिनों की लंबे बरसाती सीजन के बाद आखिरकार बुधवार को धूप निकली। इससे किसानों ने राहत की सांस ली और नरमे की फसल की ओर रुख किया। नरमे की फसल में अत्यधिक नमी से फसलों में फंगस, कीड़े, सूंडी, तना गलन, फूलों के झड़ने व खनिजों की कमी के कारण बीमारियों ने दस्तक दी है।
वहीं किसानों ने मौसम की मार के बाद भी बची हुई फसल को बचाने का प्रयास शुरू कर दिया है। किसान नरमा व कपास में फंगस, गुलाबी सुंडी, जिंक, कॉपर, एनपीके की स्प्रे कर रहे हैं। वहीं ग्वार व धान में फंगस और बाजरे में कीड़े का प्रकोप बढ़ रहा है। कुछ किसानों ने नरमे के काले पड़े टिंडों को तोड़ना शुरू कर दिया है, ताकि नरमे को खराब होने से बचाया जा सके। किसानों के अनुसार नरमा व कपास में करीब 50 प्रतिशत, धान में 35 प्रतिशत, ग्वार में 60 प्रतिशत व बाजरे में 40 प्रतिशत का नुकसान का अभी तक अनुमान है, जो अब धूप निकलने के बाद बढ़ने की उम्मीद है।
बारिश से काले हुए टिंडे
किसान महावीर, मोहन लाल, रोहित कुमाार, सतदेव, सुभाष ने बताया कि नरमा व कपास में लगे टिंडे ज्यादा बारिश से काले होकर खराब हो गए, जिन्हें तोड़कर रूई को निकाला जा रहा है। वहीं ग्वार व बाजरे की फलियों में दाने खराब व अंकुरित हुए हैं। किसानों ने बताया है कि ज्यादा बरसात से न तो अभी ग्वार की फसल निकाल सकते हैं, न जमीन के चिपके नरमा व कपास के पौधों को खड़े कर सकते हैं। न ही बाजरे के पक्के सिटे तोड़कर निकाला जा सकता है। इस बार किसानों को खरीफ फसलों की पैदावार में काफी बड़ा नुकसान हुआ है। सभी फसलों से किसानों खर्च ज्यादा आमदनी कम रहेगी। किसानों ने सरकार से नरमा, कपास, बाजरे, ग्वार, मूंग व धान की खराब हुई फसल का सर्वे करवाकर उचित मुआवजे की मांग की है।
ये रहेंगी मौसम की गतिविधियां
चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के अनुसार इस बार प्रदेश में अब तक सामान्य से 49 प्रतिशत बारिश अधिक दर्ज की गई है। राज्य में 11 से 13 सितंबर तक मानसून गतिविधियां कम होने से मौसम साफ रहेगा, लेकिन 14 से 16 सितंबर के दौरान मानसून दोबारा सक्रिय होगा और राज्य के ज्यादातर क्षेत्रों में अच्छी बारिश देखने को मिलेगी। जो किसानों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।