नोएडा (मनोज कुमार)। ट्विन टावर को गिराने के लिए विस्फोटक नागपुर से मंगाया जाएगा। इसे टावरों से करीब 100 किमी की दूरी पर लाइसेंस होल्डर स्टोर में रखेगा। 15 दिन में यह विस्फोटक ट्विन टावर में लगेंगे और हर दिन बारूद की छडे़ं नोएडा लाई जाएंगी। यह जिम्मेदारी स्टोर संचालक की होगी। विस्फोटक की गुणवत्ता के आधार पर तय होगा कि उसे कितना लाया जाएगा। विस्फोटक खरीदने के लिए नागपुर में वार्ता चल रही है। विशेषज्ञों के अनुसार जिस भी लाइसेंस होल्डर का विस्फोटक कम आवाज और अधिक काम करने वाला होगा उसेे खरीदने पर सहमति बनेगी। ट्विन टावर में बारूद की छडे़ं लगाने के लिए कम से कम 15 दिन का समय चाहिए। हर दिन संबंधित कंपनी बारूद को सुरक्षित वैन से साइट पर लेकर आएगी। एडिफिस कंपनी के सलाहकार उत्कर्ष मेहता ने बताया कि विस्फोटक खरीदने के लिए पहले नाम पर सहमति बनेगी। इसके बाद विस्फोटक आपूर्तिकर्ता जो लाइसेंस धारक होगा, उसे यह जिम्मेदारी दी जाएगी। वह नागपुर से विस्फोटक को स्टोर तक पहुंचाएगा। विस्फोटक शब्दावली में मैग्जीन को स्टोर कहा जाता है। इसे विशेष तौर पर बड़े विस्फोटक रखने के लिए बनाया जाता है। इसी तरह जिस वाहन में इसे लाया जाता है उसे भी विशेष तौर पर तैयार कराया जाता है। विस्फोटक लगाने के लिए कुछ विशेष लोगों को बुलाया जाएगा, जो केवल छड़ें लगाएंगे। विस्फोटक बचने पर उसे वापस नागपुर पहुंचाने का काम भी लाइसेंस होल्डर का होगा।
दक्षिण अफ्रीका के दो विशेषज्ञ आज पहुंचेंगे नोएडा
नोएडा। ट्विन टावर को ध्वस्त करने के लिए दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञों की टीम शुक्रवार की जगह अब शनिवार को नोएडा आएगी। इसके बाद टीम प्रोजेक्ट मैनेजर के साथ ट्विन टावर का भ्रमण करेगी और आगे की योजना बनाएंगी। वहीं, आठ सदस्यीय टीम आनी थी, लेकिन अभी दो विशेषज्ञ आएंगे। इसके बाद जैसे-जैसे काम आगे बढ़ेगा विशेषज्ञ बढ़ते जाएंगे। एडिफिस कंपनी के अधिकारी उत्कर्ष महता ने बताया कि 10 सदस्यीय विशेषज्ञों की टीम दक्षिण अफ्रीका से नोएडा आनी है। शनिवार को दो ही सदस्य आएंगे और साइट पर मौजूद प्रोजेक्ट मैनेजर मयूर महता के नेतृत्व में काम करेंगे।
सीबीआरआई की रिपोर्ट का है इंतजार
एडिफिस की ओर से अफसरों ने बताया कि ट्विन टावर को गिराने के लिए बनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट सुपरटेक ने प्राधिकरण को भेजी थी। इसका सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) अध्ययन कर रहा है। वहां से रिपोर्ट मिलने के बाद यदि कोई संशोधन होगा तो उसी के तहत आगे काम होगा।