श्रम विभाग ने पिछले नौ माह में 139 बेटियों के हाथ पीले कराएं हैं। इन बेटियों के विवाह के लिए विभाग की ओर से प्रत्येक श्रमिक को 55 हजार रुपये दिए गए। इससे गरीब मजदूरों का बेटी की शादी धूमधाम से करने का सपना पूरा हो सका है। हालांकि इस योजना का लाभ उन्हीं श्रमिकों को मिलता है, जो श्रम विभाग में पंजीकृत हैं। विभाग का कहना है कि योजनाओं को लेकर श्रमिकों में जागरूकता बढ़ रही है।
उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्ननिर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा पंजीकृत श्रमिकों के लिए कई योजनाएं चलाई जाती हैं। उसी योजना में से एक है कन्या विवाह सहायता योजना है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के सामने बेटियों की शादी में परेशानी होती है। इस वजह से कई बार बेटियों की शादी में देरी हो जाती है। या फिर पिता को बेटी की शादी के लिए कर्ज लेना पड़ता है। इससे बचाने के लिए प्रदेश सरकार ने श्रमिकों के लिए कन्या विवाह सहायता योजना की शुरूआत की। इस योजना के लिए आवेदन करने के बाद 15 दिनों के अंदर 55 हजार रुपये की आर्थिक सहायता सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है।
योजना के तहत एक मार्च से लेकर अब तक 139 श्रमिकों ने सहायता ली है। जून माह में 32, जुलाई में 3, अगस्त में 95 और सितंबर में 9 श्रमिकों ने बेटी के विवाह में आर्थिक मदद के लिए आवेदन किया। इस योजना के तहत अंतरजातीय विवाह के लिए 61,000 रुपये की धनराशि आर्थिक सहायता के रूप में प्रदान की जाती है।
मातृत्व शिशु एवं बालिका मदद योजना का लाभ भी लिया
इस योजना के तहत पंजीकृत श्रमिकों को बेटा पैदा होने पर 20,000 रुपए और बेटी होने पर 25,000 रुपए की धनराशि दी जा रही है। इसके अलावा, पुरुष कामगार की ओर से आवेदन किए जाने पर उनकी पत्नियों को मातृत्व हितलाभ के रूप में 6000 रुपए की धनराशि दी जाती है। जो पहली दो किस्तों में दी जाती थी। महिला कर्मकार को संस्थागत प्रसव की स्थिति में 3 माह के न्यूनतम वेतन के समतुल्य धनराशि और 1,000 चिकित्सा बोनस के रूप में देय होता है। इन योजना का 78 श्रमिकों ने लाभ उठाया।
139 श्रमिकों ने कन्या विवाह सहायता योजना का लाभ उठाया है। अन्य योजनाओं के प्रति भी श्रमिकों को जागरूक किया जा रहा है। विभाग की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा श्रमिक योजनाओं का लाभ उठाएं।
सरजू राम शर्मा, अपर श्रमायुक्त