कागजों में सिमट गई श्रमिक आवास की योजना
साल 2020 में लॉकडाउन के दौरान लाखों की संख्या में श्रमिक अपने घरों को लौट गए थे। यूपी में ही करीब 33 लाख श्रमिकों ने गांव वापसी की थी। अनलॉक के महीनों बाद तक श्रमिकों की कमी के कारण उद्योग पूरी तरह शुरू नहीं हो पाए। प्रवासी मजदूरों को लाने की योजना बन चुकी थीं, लेकिन इनके रहने का इंतजाम करना मुश्किल था। इसके लिए सेक्टर-122 में आशियाने की योजना बनाई गई, लेकिन वह भी कागजों में सिमटकर रह गई।
सप्ताहांत लॉकडाउन से दूर हुई दिल्ली
नोएडा और ग्रेटर नोएडा की औद्योगिक इकाइयों में हजारों की संख्या में कर्मचारी दिल्ली से काम करने के लिए आते हैं। दिल्ली में रात्रि कर्फ्यू के बाद शनिवार और रविवार का संपूर्ण लॉकडाउन भी कर दिया गया है। पहले ही दिन इसका असर साफ दिखा। नोएडा के उद्योग और कार्यालयों में श्रमिकों व कर्मचारियों की संख्या 50 फीसदी कम रही। सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र नाहटा ने डीएम और पुलिस आयुक्त से सीमाओं पर कामगारों को आने-जाने में होने वाली दिक्कतों के समाधान की मांग की है। उन्होंने कहा कि कोरोना की पहली और दूसरी लहर में सबसे ज्यादा नुकसान उद्योगों को उठाना पड़ा। इस बार ऐसा न हो, इसके लिए समय रहते कदम उठाए जाने चाहिए।
घबराए दिहाड़ी मजदूर, गांव की ओर चले
कोरोना के केस लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। शनिवार को जिले में 1,100 से भी अधिक मामले सामने आए। अब पाबंदियां भी बढ़ने लगी हैं। इसका सीधा असर दिहाड़ी मजदूरों पड़ रहा है। पाबंदियां बढ़ने के बाद से ही शहर में लॉकडाउन की आहट होने लगी है। इसकी वजह से अब दिहाड़ी मजदूर अपने गांव की ओर चल दिए हैं। लेबर चौक पर मौजूद मजदूरों ने बताया कि कुछ ही दिन में 250 से 300 मजदूर अपने गांव चले गए हैं। कई घर जाने का मन बना चुके हैं। मजदूरों का कहना है कि यदि सरकार लॉकडाउन लगाने का विचार बना रही है तो हमें गांव पहुंचाने का साधन भी उपलब्ध कराए।