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Noida News: ...हमने हर ख्वाब को वतन से जोड़ा है

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- उजीना के 200 से अधिक जवान आज भी कर रहे देश सेवा
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- शादी के तीन माह बाद ही बलिदान हो गए थे उजीना के शेर सिंह राजपूत
मोहित शुक्ला
नूंह। फौजियों की फैक्टरी कहे जाने वाले उजीना गांव में हर घर से एक ही आवाज आती है... हमने हर ख्वाब को वतन से जोड़ा है। गांव ने अब तक देश को करीब 700 जवान दिए हैं। राजपूत बाहुल्य आबादी वाले इस गांव में करीब 15 हजार लोग रहते हैं। गांव के 200 से अधिक युवा आज भी सेना में देश की सेवा कर रहे हैं। उजीना के एक जवान देश की सेवा करते हुए शादी के तीन माह बाद ही शहीद हो गए थे वहीं, इसी गांव के एक पर्वतारोही जवान पांच देशों में जाकर तिरंगा फहरा चुके हैं।

उजीना के रहने वाले शेर सिंह राजपूत आर्मी की 13 राजपूत बटालियन में सेवा दे रहे थे। 1967 में उनकी शादी हुई थी। शादी के तीन माह बाद ही भारत और चीन के बीच तनाव की स्थिति बनने पर उन्हें सीमा पर बुला लिया गया। इस दौरान हुए युद्ध में शेर सिंह राजपूत बलिदान हो गए। इसके बाद उनकी वीरांगना उर्मिला देवी आज भी उनको याद करके भावुक हो जाती हैं। उनका पूरा परिवार उनके नाम से गौरवान्वित महसूस करता है। उनकी पत्नी उर्मिला देवी का कहना है कि पति के शहीद होने के बाद देश के लोगों व प्रशासन ने उनका काफी सहयोग किया है। आज भी प्रशासनिक व सरकारी कार्यक्रमों में उन्हें सम्मानित करने के लिए बुलाया जाता है और सभी लोग शेर सिंह के बलिदान को याद करते हैं।
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वर्ल्ड रिकॉर्ड भी किया है अपने नाम
उजीना गांव के रहने वाले नेहपाल सिंह 2002 में आर्मी ज्वाइन की थी। 2011 से अभी तक वे 6 देशों की यात्रा कर चुके हैं। नेहपाल सिंह हरियाणा में पहले नंबर के अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही हैं। 2023 में नेपाल सिंह ने देश के सभी राज्यों की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा लहराकर विश्व रिकॉर्ड भी बनाया है। इस कार्य में उन्हें करीब एक साल का समय लगा था। इसके अलावा वह पांच देश पोलैंड, नेपाल, साउथ सूदान, तंजानिया में जाकर भी ऊंचे पर्वतों की चोटी पर तिरंगा लहराने के रिकॉर्ड बना चुके हैं।
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200 लोग अभी भी दे रहे है सेवाएं
उजीना गांव के युवा अभी भी देश सेवा में जिले में सबसे आगे हैं। उजीना के कृष्णा, विशाल साहू, जगत, तरुण, करण, जितेंद्र, प्रशांत, विष्णु, कुलदीप, पवन, रोहित, हिमांशु, बिट्टू, दिनेश कौशिक, योगेश पंडत, अजय, सौरभ, मोंटी, सचिन फौजी व नरेश के साथ करीब 200 युवा अभी भी देश की सेवा में लगे हुए हैं। यही कारण है कि मेवात में उजीना को फौजियों की फैक्टरी के नाम से भी जाना जाता है।
पर्वत पर चढ़ने के बाद तिरंगा फहराते नेहपाल सिंह
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