ग्रेटर नोएडा (सुशील पांडेय)। जिले में मंगलवार शाम 6 बजे चुनाव प्रचार थम गया। प्रचार के अंतिम समय तक प्रमुख प्रत्याशी चुनावी ध्रुवीकरण में लगे रहे। कोई जातीय समीकरण में अपनी जीत तलाश रहा तो कोई प्रमुख चेहरे के नाम पर वोट मांग रहा। सबकी एक ही इच्छा, किसी तरह से इस बार चुनाव जीत जाएं। यही वजह कि मुख्यमंत्री योगी तक आखिरी समय में यहां पहुंच गए। जेवर और दादरी विधानसभा सीट का चुनाव रोचक मोड़ ले चुका है। बड़ी रैली या रोड शो पर प्रतिबंध होने की वजह से मतदाता का मूड भांपना थोड़ा मुश्किल रहा। लेकिन प्रत्याशियों और पार्टियों ने घर-घर प्रचार और छोटी सभाओं के जरिये जनता के बीच तक पहुंचने की कोशिश की गई। शायद इससे काम न बन पाए, लिहाजा जातीय समीकरण और प्रमुख चेहरों जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, पूर्व मुख्यमंत्री मायावती, रालोद प्रमुख जयंत चौधरी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नाम पर भी प्रत्याशी वोट मांग रहे।
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गुर्जर समुदाय के वोट पर सबकी नजर
गुर्जर समुदाय के वोट पर सभी प्रमुख प्रत्याशियों की नजर है। अधिकांश उम्मीदवार भी इसी समुुदाय से आते हैं। सम्राट मिहिर भोज प्रतिमा विवाद के बाद गुर्जर समुदाय के वोट को पाने के लिए विपक्षी पार्टियों ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है। दादरी विधानसभा के प्रत्याशी मनवीर भाटी मंगलवार को मिहिर भोज की प्रतिमा पर आशीर्वाद लेने पहुंचे। यहां नोकझोंक भी हुई। इससे पहले अखिलेश यादव व जयंत चौधरी यहां आए लेकिन प्रतिमा तक नहीं पहुंच पाए। ऐसे में सम्राट मिहिर भोज की फोटो को उठाकर मतदाताओं को लुभाया। रालोद प्रमुख जयंत चौधरी ने नोएडा एयरपोर्ट का नामकरण मिहिर भोज के नाम पर कराने का वादा किया है। जेवर से बसपा प्रत्याशी नरेंद्र भाटी डाढ़ा भी गुर्जर समुदाय के समर्थन का दावा कर रहे हैं, हालांकि भाजपा प्रत्याशी तेजपाल नागर का कहना है कि उनका सभी वर्ग और समुदाय के लोगों का समर्थन है।
ब्राह्मण मतदाताओं को साधने के लिए लगाया जोर
भाजपा ने ब्राह्मण मतदाताओं को साधने के लिए पूरा जोर लगा दिया। उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा को जेवर बुलाकर ब्राह्मण वोट साधने की कोशिश की गई, वहीं अंतिम समय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जेवर बुलाकर भाजपा ने भरपाई करने की पूरी कोशिश की है। बताया जा रहा है कि ब्राह्मण समुदाय सत्ता पक्ष से नाराज है। लिहाजा विपक्षी पार्टियां भी इस वोट बैंक को पाने के लिए खूब जोर लगा रही हैं।
विपक्ष के लिए मुस्लिम वोटर भी अहम
जेवर और दादरी विधानसभा से पिछले चुनाव में भाजपा प्रत्याशी धीरेंद्र सिंह और तेजपाल नागर ने जीत हासिल की थी। इस बार विपक्षी दलों के प्रत्याशी जीत हासिल करने के लिए वैसे समुदाय पर फोकस कर रहे हैं जो कि मानते हैं कि यह भाजपा का वोट बैंक नहीं है। हालांकि भाजपा प्रत्याशी इससे इत्तेफाक नहीं रखते और उनको भी अपना वोटर मानते हैं। ऐसे में मुसलिम समुदाय का वोट विपक्ष के लिए अहम हो जाता है।
बाहरी और स्थानीय भी है मुद्दा
इस बार के चुुनाव में बाहरी और स्थानीय प्रत्याशी भी एक मुद्दा है। स्थानीय प्रत्याशियों की ओर से उनको वोट देने की अपील की जा रही है। वहीं, जिन प्रत्याशियों को बाहरी बताकर रेस से पीछे करने की कवायद चल रही है। उनकी ओर से भी यहां के स्थानीय निवासी होने का सुबूत दिया जा रहा है। हालांकि अब वोटर तय करेगा कि वह किसे चुनें।
स्थानीय विधायकों को रोजगार के मुद्दे पर घेर रहे
जेवर और दादरी विधानसभा के चुनाव में इस बार रोजगार का मुद्दा भी काफी चर्चित रहा है। स्थानीय लोगों के वोट पाने के लिए रोजगार के मुद्दे को जमकर उठाया जा रहा है। रोजगार को लेकर स्थानीय युवा भी काफी परेशानी की हालत में हैं। लिहाजा हर कोई इनको भुनाना चाहता है। स्थानीय स्तर पर युवाओं को कोई 40 तो कोई 50 प्रतिशत तक आरक्षण दिलाने का वादा कर रहा है।
दादरी विधानसभा
पुरुष मतदाता - 332589
महिला मतदाता - 272763
कुल मतदाता - 605431
जेवर विधानसभा
पुरुष मतदाता - 190619
महिला मतदाता - 159828
कुल मतदाता - 350465