अंतिम संस्कार के दौरान परेशानियों का करना पड़ रहासामना
आशीष शर्मा
यमुना सिटी। जेवर के रामपुर गांव के निवासी कई साल से श्मशान घाट के जीर्णोद्धार का इंतजार कर रहे हैं। वर्षो पहले सरकार द्वारा रामपुर गांव से पास सूखी यमुना नदी में श्मशान घाट बनाया गया था, लेकिन यमुना में वापस पानी आने के कारण ग्रामीण श्मशान घाट का उपयोग नहीं कर सके। इस समस्या के चलते ग्रामीणों ने अपने स्तर पर उसी श्मशान घाट के पास एक छोटा श्मशान घाट बनवाया, लेकिन अब उसकी हालत भी जर्जर हो चुकी है। ऐसे में ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के दौरान परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों की मांग है प्राधिकरण की ओर से गांव में एक नया श्मशान घाट बनवाया जाए।
यमुना में बना घाट नहीं आया काम: ग्रामीणों ने बताया कि कई साल पहले सरकार की ओर से सुखी पड़ी यमुना नदी में श्मशान घाट बनवाया गया था। कुछ समय बाद यमुना में पानी आने के कारण ग्रामीण उसका उपयोग नहीं कर पाए। समय के साथ घाट की स्थिति और भी खराब हो गई। गांव में उचित व्यवस्था नहीं होने से उन्हें अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने में दिक्कत होती है जिससे ग्रामीण परेशान हैं। ग्रामीणों ने बताया की गांव में श्मशान घाट की उचित व्यवस्था न होने के कारण गांव के निवासी सतीश चंद्र ने ही नया श्मशान घाट बनवाया था। कई साल बीत जाने के बाद अब उस श्मशान की हालत भी काफी जर्जर हो चुकी है, जिसके चलते ग्रामीण काफी परेशान हैं। ग्रामीण सतीश चंद्र ने बताया कि जब वह दिल्ली पुलिस में तैनात थे तब उनके पिता का निधन हो गया था। पिता के निधन के बाद अंतिम संस्कार के दौरान उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। गांव में श्मशान घाट की उचित व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीणों को भी परेशानी होती थी। ऐसे में उन्होंने ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए और पिता की याद में अपने पैसों से छोटा-सा श्मशान घाट बनवाया, ताकि लोगों को अंतिम संस्कार के लिए भटकना न पड़े।
ग्रामीणों का कहना है कि सतीश चंद्र द्वारा पिता की याद में बनवाया श्मशान घाट अब जर्जर हो चुका है और घाट छोटा होने के कारण कभी-कभी दो शव आने पर लोगों को कई घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। इससे अंतिम संस्कार में देरी होती है और परिजनों को परेशानी झेलनी पड़ती है।
बरसात के मौसम में बढ़ जाती है ग्रामीणों की परेशानी: ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के बाद गांव के श्मशान घाट की स्थिति और भी ज्यादा खराब हो जाती है क्योंकि ज्यादा बरसात के बाद यमुना के पानी का स्तर बढ़ने के कारण दोनों श्मशान घाट कई फीट पानी के अंदर चला जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बाद भी गांव में श्मशान घाट की उचित व्यवस्था नहीं कराई गई है। ग्रामिणों की मांग है गांव में नया श्मशान घाट बनाया जाए, ताकि ग्रामीणों को अंतिम संस्कार जैसी चीजों के परेशान न होना पड़े।
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ग्रामीणों की समस्या को देखकर पिता जी की याद में श्मशान घाट बनवाया था, पर अब वह भी जर्जर हो चुका है- सतीश चंद्र
बरसात के मौसम में पानी भर जाने के कारण ग्रामीण श्मशान घाट का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं। - यादराम शर्मा
गांव बड़ा होने के कारण कभी-कभी ऐसा होता है, घाट पर दो चिता एक साथ जाने के कारण दिक्कत होती है - हेमपाल सिंह
कई बार शिकायत करने के बाद भी गांव में श्मशान घाट की उचित व्यवस्था नहीं की गई है। - भूदेव शर्मा