फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सचिवालय के बाद भी सुविधाओं से अछूते हैं ग्रामीण

विज्ञापन
विज्ञापन
नूंह। सरकार ने ग्रामीणों तक सुविधाएं और योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए ग्राम सचिवालय की स्थापना की थी। हालांकि शुरुआती दिनों में तो अधिकारी-कर्मचारी आए, लेकिन उसके बाद से धीरे-धीरे आना बंद कर दिया। वर्तमान में स्थिति यह है कि न तो कोई अधिकारी पहुंचता है और न ही कर्मचारी कभी बैठते।
विज्ञापन

जिला प्रशासन ने नूंह जिले के 91 गांवों में ग्राम सचिवालय शुरू करने की योजना बनाई थी। इनमें से 51 बनकर तैयार हो गए हैं, हालांकि महज 36 गांवों में ये चल रहे हैं। लेकिन इसमें खानापूर्ति ही हो रही है। जिले में इंडरी, उजीना, मालब, कलवाड़ी, मढी, पिनगवां, साकरस, टांई, सहसौला, खेडली नूंह, रेवासन, राजाका, आलदौका, खेड़ा खलीलपुर, बीवां, हिरवाडी, मानोता, नाई नंगला, मांडीखेड़ा, अड़बर, अलावलपुर, फिरोजपुर नमक, जयसिंहपुर, संगेल, उजीना, बिसरू, जहटाना, औथा, शिकरावा, तेड, चीला, पढैनी, रावली व भिरावटी आदि में ग्राम सचिवालय हैं।
सरकार का मकसद था कि इन पर जनस्वास्थ्य विभाग, बिजली निगम, आंगनबाड़ी, राजस्व, पंचायत, कृषि सहित कई विभागों के कर्मचारी बैठकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनेंगे और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को उन तक पहुंचाएंगे। इन केंद्रों पर दो-चार दिन तो दो-तीन कर्मचारी व अधिकारी आए, लेकिन उनके बाद से यहां सभी ने आना-जाना बंद कर दिया।
विज्ञापन

स्टाफ का टोटा बना बांधा
कृषि विभाग, पंचायत सहित कई महकमों में स्टाफ का भारी टोटा है। ऐसे में दोनों जगह सेवा देना इतना आसान नहीं है। राजस्व विभाग, बिजली निगम, जनस्वास्थ्य, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य सहित कई विभागों के कर्मचारी व अधिकारी जरूर यहां सरकार के आदेशों को पलीता लगाते दिखाई दे रहे हैं। पटवारी तो यहां शक्ल ही नहीं दिखाते।
ये मिलना था लाभ
जब सचिवालय बनाए गए थे तब सरकार की योजना थी कि इनमें प्रतिदिन एक विभाग का कोई अधिकारी जाकर बैठे तथा ग्रामीणों की समस्याओं को सुनकर उनका समाधान करें। इसके अलावा ग्राम सचिव व पटवारी भी सचिवालय में बैठकर ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करे। कंप्यूटर आपरेटर वहां से ग्रामीणों की मांग के अनुसार जमीन की फर्द निकालना, इंतकाल चढ़ाना, आधार कार्ड व पेन कार्ड बनाना, आधार कार्ड से उनके खातों व अन्य जरूरी कार्यों को करना, सरकारी नौकरियों में बेरोजगारों के आवेदन करवाने जैसी सुविधाएं देने का वादा किया गया था।
कार्यालय पर हो चुका अवैध कब्जा
सरकार द्वारा बनाए गए ग्राम सचिवालय में लोगों ने पशु बांधे हुए हैं। कहीं पर कबाड़ भरा हुआ है, तो कहीं पर रहन-सहन भी शुरू कर दिया गया है।
क्या कहते हैं क्षेत्रवासी
संतलाल सरपंच खेड़ा खलीलपुर, कमल सरपंच इंडरी, हनीफ सरपंच फिरोजपुर नमक, आबिद सरपंच सलंबा, साबिर सरपंच मालब आदि ने बताया कि ग्राम सचिवालय की सरकार ने अच्छी पहल की है, लेकिन यहां पर सुविधा मुहैया करानी चाहिए। जिससे जिले के लोगों को इनका लाभ मिल सके। लोगों को अभी भी छोटे-छोटे कार्यों के लिए ब्लाक, उपमंडल व जिलास्तर पर दौड़ लगानी पड़ रही है। वहीं जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी राकेश मोर ने बताया कि सचिवालयों के बारे में रिपोर्ट ली जाएगी। वैसे कई गांवों में ग्राम सचिवालय में कार्य किया जा रहा है। अगर कहीं पर ग्रामीणों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है तो वहां भी व्यवस्था कराई जाएगी।
वर्जन-
जिले में ग्राम सचिवालय सिर्फ कागजों तक सिमटे हुए हैं। सरकार विकास का झूठा ढकोसला कर रही है जबकि जमीनी स्तर पर कोई विकास नहीं है। - फकरुद्दीन एडवोकेट, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता
ग्राम सचिवालय की पहल तो अच्छी है लेकिन इन सचिवालयों में अभी सुविधाओं का अभाव है। गांवों में अभी सचिवालय नहीं चल रहे हैं। - मामन खान, विधायक फिरोजपुर झिरका
प्रदेश की भाजपा सरकार ने जिले के साथ प्रदेश में विकास कर रफ्तार दी है। सचिवालयों की समस्या को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा। - बीरपाल पंवार, युवा जिला अध्यक्ष भाजपा
आज बडक़ली चौक पर प्रदेश के उपमंख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला आ रहे हैं। उनके समक्ष जिले से जुड़ी कई बड़ी समस्याओं को रखा जाएगा। उम्मीद है कि उपमुख्यमंत्री जिले की सभी समस्याओं का प्रमुखता से समाधान कराएंगे। - आजाद मोहम्मद, पूर्वमंत्री, फिरोजपुर झिरका
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें