गुरु मंत्र कॉलम
खेल के मैदान से मिलती है जीवन की सीख
बच्चों के सर्वांगीण विकास में पढ़ाई के साथ खेलों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। क्रिकेट बच्चों को सिर्फ शारीरिक रूप से मजबूत नहीं बनाता, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, अनुशासन, धैर्य और नेतृत्व क्षमता भी विकसित करता है।
अभिभावकों को बच्चों को कम उम्र से ही खेलों से जोड़ना चाहिए। क्रिकेट प्रशिक्षण के दौरान फिटनेस, फील्डिंग, मानसिक मजबूती और खेल भावना पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। मैदान पर हर खिलाड़ी को टीम के साथ मिलकर खेलना, हार से सीखना और जीत में विनम्र रहना आता है।
हर बच्चा खेल के मैदान से केवल क्रिकेट की तकनीक ही नहीं, बल्कि अनुशासन, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास भी लेकर जाए। बच्चों को सही मार्गदर्शन और बेहतर मंच मिले, तो वे खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के साथ जीवन में भी सफलता हासिल कर सकते हैं।
खेल में जीत से ज्यादा जरूरी है लगातार बेहतर बनने की कोशिश। मेरा लक्ष्य है कि हर बच्चा मैदान से आत्मविश्वास, अनुशासन और सकारात्मक सोच लेकर आगे बढ़े।
संजीव कुमार, शारीरिक शिक्षा शिक्षक एवं क्रिकेट कोच, इंडस वैली पब्लिक स्कूल