बोर्ड की फरवरी की रिपोर्ट के मुताबिक जिले के साइलेंट जोन (स्कूल, कॉलेज, अस्पताल के आसपास) में 66.8 डेसिबल ध्वनि प्रदूषण दिन में और रात में यह 58.5 डेसिबल तक रहता है। जबकि बोर्ड के तय मानकों के मुताबिक यह दिन में 50 तो रात में 40 डेसिबल तक होना चाहिए। यानी दिन में 16.8 डेसिबल और रात में 18.5 डेसिबल तक ज्यादा रहता है। इसका सबसे बड़ा कारण वाहन बताए गए हैं।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में सबसे अधिक ध्वनि प्रदूषण व्यावसायिक, रिहायशी और साइलेंट जोन में पाया गया है। ताज्जुब है कि जिन स्थलों के आसपास ध्वनि का स्तर तय मानक से अधिक नहीं होना चाहिए, वहां यह सबसे अधिक है।
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बोर्ड की फरवरी की रिपोर्ट के मुताबिक जिले के साइलेंट जोन (स्कूल, कॉलेज, अस्पताल के आसपास) में 66.8 डेसिबल ध्वनि प्रदूषण दिन में और रात में यह 58.5 डेसिबल तक रहता है। जबकि बोर्ड के तय मानकों के मुताबिक यह दिन में 50 तो रात में 40 डेसिबल तक होना चाहिए। यानी दिन में 16.8 डेसिबल और रात में 18.5 डेसिबल तक ज्यादा रहता है। इसका सबसे बड़ा कारण वाहन बताए गए हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रत्येक क्षेत्र को जोन के अुनसार बांटा गया है। माह में दो बार इन क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण की जांच की जाती है। यह रिपोर्ट सभी विभागों को भेजी जाती है। इसके बाद सभी विभाग अपने अधिकार क्षेत्र में कार्रवाई करते हैं। रिपोर्ट में सामने आया कि सबसे अधिक ध्वनि प्रदूषण व्यावसायिक, रिहायशी और साइलेंट जोन में होता है, वहीं औद्योगिक क्षेत्रों में यह सामान्य बना हुआ है।