नूंह (अंतराम खटाना)। प्रदेश के अन्य जिलों के मुकाबले मेवात में बेटियों की शिक्षा की दशा काफी दयनीय है। ऐसी बेटियों को शिक्षा दिलाने में अब कुछ महिलाएं अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इनमें नूंह खंड के उजीना गांव में स्कूल चला रही ऊषा वर्मा भी शामिल हैं। उषा करीब 20 वर्षों से बेटियों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे लाने के लिए प्रयासरत हैं। ऊषा ने बताया कि उनसे पढ़ी बेटियां एमबीबीएस, बीटेक और एमटेक आदि की पढ़ाई कर कर रही हैं।
ऊषा ने बताया कि नूंह में महिलाओं की साक्षरता दर 37.58 फीसदी है। इसी बात को ध्यान में रखकर उन्होंने बेटियों की शिक्षित करने का बीड़ा उठाया। ऊषा ऐसी बेटियों को निशुल्क पढ़ा रही हैं, जिनके अभिभावक पढ़ाई का खर्च उठाने में असमर्थ हैं। संघर्ष की मिसाल उषा ने गरीबी, महिला उत्पीड़न और बेटियों की पढ़ाई के प्रति बनी उदासीनता के इस दर्द को भी सहा है। इसी दर्द ने उन्हें न केवल शिक्षित कर काबिल बना दिया, बल्कि नूंह जैसे पिछड़े क्षेत्र में स्कूल खोलकर गरीब बेटियों को भी शिक्षित करने की प्रेरणा दी। ऊषा पिछले करीब एक दशक में लगभग 125 लड़कियों को अपने स्कूल में निशुल्क शिक्षा ग्रहण करा चुकी हैं। इनमें से कई बेटियों की नौकरी भी लग गई है। फिलहाल, 54 बेटियां उनके स्कूल में फ्री शिक्षा शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। उन्होंने बताया कि करीब 20 साल पहले जिले में बेटियों को पढ़ाना तो दूर कोई पढ़ाई के बारे में सोच भी नहीं सकता था। इसके बाद उन्होंने उजीना में आदित्य आर्मी स्कूल चलाने का निर्णय लिया। इसके बाद धीरे-धीरे ग्रामीणों से डोर-टू-डोर संपर्क कर बेटियों को शिक्षा दिलाने के लिए प्रेरित किया। उषा ने जिले के लोगों से अपील की है कि वह भी बेटियों की शिक्षा पर अवश्य ध्यान दें।