फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पांच हजार में बेचते थे 60 रुपये में बना स्टेरॉयड इंजेक्शन

विज्ञापन
नकली स्टेरॉयड व सामान। संवाद - फोटो : Grnoida
विज्ञापन
ग्रेटर नोएडा/दादरी। बादलपुर कोतवाली क्षेत्र के बिसनुली गांव में अवैध रूप से चल रही कंपनी में नकली स्टेरॉयड का एक इंजेक्शन 50 से 60 रुपये में तैयार होता था। इसके बाद नामी विदेशी कंपनियों के नाम से यह इंजेक्शन हरियाणा और पंजाब के युवाओं को 3000 से 5000 रुपये में बेचा जा रहा था। एक बॉयोटेक इंजीनियर ने हरियाणा के दो युवकों के साथ मिलकर छह माह पहले यह कंपनी शुरू की थी। इसके बाद से लगातार स्टेरॉयड के इंजेक्शन बेचे जा रहे थे।
विज्ञापन

मेरठ मंडल के विभिन्न जिलों के औषधि विभाग की टीमों ने शनिवार को छापा मारकर दो कमरों में चल रही नकली स्टेरॉयड बनाने की कंपनी पकड़ी थी। रविवार को प्रेसवार्ता में डीसीपी इलामारन ने बताया कि मौके से मुख्य आरोपी अनुज कुमार निवासी वाराणसी, बचन कुमार निवासी खानपुर बुलंदशहर और प्रीतम निवासी अमोगपुर चंदौली को गिरफ्तार किया था। इनके पास से सवा करोड़ रुपये की स्टेरॉयड, एक गाड़ी, स्कूटी, मशीनें और उपकरण भी बरामद किए गए थे। गिरोह के दो बदमाश अभी फरार हैं। इनकी पहचान हरियाणा के रेवाड़ी निवासी प्रवीण धनकड व सोमवीर के रूप में हुई है। औषधि निरीक्षक वैभव बब्बर ने बताया कि अनुज 50 से 60 रुपये में स्टेरॉयड का एक इंजेक्शन तैयार कर प्रवीण व सोमवीर को 650 रुपये में बेचता था जबकि प्रवीण और सोमवीर बाजार में यह इंजेक्शन 3000 से 5000 में बेचते थे।
अनुभव और जरूरत से बनाया गिरोह
मुख्य आरोपी अनुज ने चेन्नई के टीआईएल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बॉयोटेक इंजीनियरिंग की थी। वर्ष 2013 में उसने नौकरी शुरू की। वह हैदराबाद, गोवा और मुंबई की कई कंपनियों में नौकरी कर चुका है। यहां उसे स्टेरॉयड और प्रोटीन बनाने का काम अनुभव हो गया था। इस बीच उसकी मुलाकात प्रवीण और सोमवीर से हुई। दोनों को बाजार में स्टेरॉयड की जरूरत का पता था। दोनों ने अनुज के साथ मिलकर कंपनी बनाने का फैसला किया। प्रवीण और सोमवीर कच्चा माल उपलब्ध कराते थे। अनुज उससे इंजेक्शन और टेबलेट बनाकर देता था। दोनों ने अनुज को गाड़ी भी दी थी। उसी से माल पहुंचाया जाता था।
विज्ञापन

सवा लाख की जगह तीन लाख कमाने लगा
अनुज मुंबई की एक कंपनी में नौकरी करता था। वहां उसका मासिक वेतन सवा लाख रुपये था। जल्द अमीर बनने के सपने को पूरा करने के लिए उसने यह कंपनी शुरू की। इसके बाद तीन लाख रुपये हर माह कमाने लगा। करीब छह माह पूर्व अनुज ने यह कंपनी शुरू की थी, जबकि मकान करीब नौ माह पूर्व खरीद लिया था। एक साल पूर्व ही कंपनी शुरू करने की योजना बना ली थी।
इंपोर्टेड के नाम पर करते थे युवाओं का शिकार
हरियाणा और पंजाब के युवाओं में बॉडी बिल्डिंग का काफी जुनून है। गिरोह ने इसका फायदा उठाना शुरू किया। दादरी में तैयार स्टेरॉयड को रूस, अमेरिका, बर्लिन, मैक्सिको समेत अन्य देशों के नाम पर युवाओं को बेचा जा रहा था। इंपोर्टेड के नाम पर मनमाना पैसा वसूल रहे थे। भविष्य में गिरोह बड़ी मात्रा में स्टेरॉयड के इंजेक्शन की खपत कर करोड़ों रुपये कमाने की फिराक में था।
जांच के बाद पता चलेगी स्टेरॉयड की गुणवत्ता
कंपनी से जब्त स्टेरॉयड की गुणवत्ता कैसी थी, इसका अभी पता नहीं है। स्टेरॉयड का सैंपल जांच के लिए लैब भेजा गया है। एक सप्ताह में इसकी रिपोर्ट आने के बाद ही गुणवत्ता का पता चलेगा। हालांकि, गुणवत्ता खराब होने की आशंका है। इससे युवाओं को नुकसान पहुंच सकता है। विभाग अभी तक बेचे गए स्टेरॉयड का पता लगा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें