सिर्फ मरीजों को ही नहीं डॉक्टरों को भी मिली मदद, आज मनाया जाएगा विश्व एनेस्थीसिया डे
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। जब एनेस्थीसिया नहीं था तब ऑपरेशन से पहले मरीज के किसी हिस्से को सुन्न करने के लिए बर्फ का सहारा लिया जाता था। ऑपरेशन के दर्द से कई मरीज सदमे में चले जाते थे या फिर दम तोड़ देते थे। अब एनेस्थीसिया ने इस दर्द से बचा लिया है, लेकिन ऑपरेशन के दौरान मरीज को एनेस्थीसिया की डोज देने में थोड़ी भी गलती हो जाए तो मरीज की जान तक जा सकती है। हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि एनेस्थीसिया बहुत सुरक्षित है और इसको देने वाले पूरी तरह से प्रशिक्षित हैं। आज विश्व एनेस्थीसिया डे पर शहर के अस्पतालों में कार्यक्रम का आयोजन भी होंगे।
फोर्टिस अस्पताल के जनरल एनेस्थीसिया विभाग के डायरेक्टर डॉ. अनुतम राय ने बताया कि जब एनेस्थीसिया नहीं था तब सुन्न करने के लिए अलग-अलग तरह की तकनीक अपनाई जाती थी। दांत के दर्द को कम करने के अफीम का पत्ते का सहारा लिया जाता था। शरीर के किसी हिस्से को सुन्न करने के लिए बर्फ का सहारा लिया जाता था। जब कुछ संभव नहीं होता था तो मरीज को अच्छे से जकड़कर ऑपरेशन करते थे। कई बार दर्द सहन न कर पाने की स्थिति में लोग सदमे में भी चले जाते थे और बेहोश हो जाते थे। एनेस्थीसिया की डोज देने से पहले कई चीजें ध्यान रखनी पड़ती हैं, जैसे मरीज का वजन, उम्र, मरीज को किसी तरह की परेशानी तो नहीं है। उसके बाद ही एनेस्थीसिया दिया जाता है। एनेस्थीसिया कई प्रकार का होता है। इससे डॉक्टरों को भी ऑपरेशन करने में काफी सुविधा हुई है।
-
सही डोज बहुत जरूरी
ग्रेनो वेस्ट स्थित सर्वोदय अस्पताल के एनेस्थलोजिस्ट डॉक्टर विकास सेंगर ने बताया कि एनेस्थीसिया की दवाओं की पर्याप्त खुराक देना अनिवार्य है। यदि खुराक कम है तो रोगी को सर्जरी के दौरान दर्द महसूस हो सकता है या ऑपरेशन थियेटर की कुछ घटनाएं याद आ सकती हैं। अधिक खुराक होने पर रोगी का रक्तचाप, हृदय गति में अचानक गिरावट हो सकती है या कार्डियक अरेस्ट की स्थिति आ सकती है। एनेस्थीसिया ने न केवल रोगियों के लिए बल्कि सर्जनों के लिए भी सर्जरी को बहुत सुविधाजनक बना दिया है।