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सुपरटेक के ट्विन टावर गिराने के लिए अमेरिकी कंपनी एडफिस का चयन

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नोएडा। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद सुपरटेक के 40 मंजिला ट्विन टावर गिराने की दिशा में तेजी आ गई है। सुपरटेक की सुझाई गई कंपनी अमेरिकी कंपनी एडफिस के नाम पर प्राधिकरण ने मुहर लगा दी है। सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) से सलाह कर प्राधिकरण ने कंपनी को फाइनल किया है। प्राधिकरण ने सुपरटेक बिल्डर को निर्देश दिया है कि वह शनिवार तक कंपनी से ध्वस्तीकरण के करार को अंतिम रूप देकर प्राधिकरण को सूचित करे।
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सुपरटेक की ओर से एडफिस की कार्ययोजना प्राधिकरण को सौंपी गई थी। कंपनी के अधिकारियों ने बताया था कि इससे पहले वह जोहांसबर्ग में 108 मीटर ऊंची इमारतों को ध्वस्त कर चुके हैं। वहां भी एक इमारत से दूसरी इमारत की दूरी मात्र आठ मीटर थी, जबकि ट्विन टावर की ऊंचाई करीब 100 मीटर है और इनके बीच की दूरी 9 मीटर है। कंपनी ने अपनी कार्ययोजना में बताया था कि ट्विन टावर को ‘वाटरफॉल इंप्लोजन कौलेप्स मैकेनिज्म’ से ढहाया जाएगा। यह पूरी तरह से कंट्रोल ब्लास्ट होगा। इसमें बिल्डिंग ठीक उसी प्रकार एक ओर गिरती चली जाएगी, जैसे किसी झरने से पानी गिरता है। कंपनी ने यह भी बताया कि टावर तोड़ने की तैयारी में ही तीन माह का समय लग जाएगा। पूरी तैयारी होने के बाद मात्र दस सेकेंड में ही इमारत मलबे में तब्दील हो जाएगी। हालांकि, मलबा साफ करने में भी करीब तीन माह का ही समय और लगेगा।
इस कार्ययोजना को प्राधिकरण ने सीबीआरआई को भेजा था। सीबीआरआई ने इसमें करीब आधा दर्जन सुझाव देते हुए कार्ययोजना में शामिल करने की बात कही थी। अभी यह प्रकरण चल ही रहा था कि बुधवार को खरीदारों की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते प्राधिकरण को आदेश दिया था कि वह 17 जनवरी तक कंपनी का नाम फाइनल करके सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराएं।
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