UP Lok Sabha Election 2024
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2011 के जनसंख्या के आंकड़ों के मुताबिक गौतमबुद्धनगर में हिंदू आबादी करीब 85 फीसदी है। 47 फीसदी शहरी और 53 फीसदी ग्रामीण आबादी वाली इस सीट पर पहली बार 2009 में हुए चुनाव में बसपा के सुरेंद्र सिंह नागर जीते थे। भाजपा से उतरे डॉ. महेश कुमार शर्मा तब महज 2.15 प्रतिशत वोटों के अंतर से हारे थे।
2014 में भाजपा से फिर डॉ. महेश शर्मा उतरे और 50.01 प्रतिशत वोट शेयर के साथ भगवा परचम फहरा दिया। 2009 के चुनाव में 33.24 फीसदी वोट शेयर हासिल करने वाली बसपा 2014 में 16.53 प्रतिशत पर सिमटकर तीसरे पायदान पर खिसक गई। जबकि 26.64 प्रतिशत वोट शेयर के साथ सपा दूसरे स्थान पर आने में कामयाब रही थी।
2019 की बात करें तो भाजपा ने अपने रिकॉर्ड को तोड़ते हुए 59.64 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया। बसपा से उतरे सतवीर ने दम दिखाया जिससे पार्टी की मतों में हिस्सेदारी बढ़कर 35.46 प्रतिशत हो गई। ये आंकड़े बहुत कुछ इस सीट के मिजाज को स्पष्ट कर देते हैं।
हम सुबह नोएडा के सेक्टर-76 से आगे स्थित बरौला गांव पहुंचे। पार्क में टहलने आए कुछ लोग चर्चा में मशगूल मिले। ये सभी अलग-अलग राज्यों के रहने वाले हैं। चुनावी चर्चा छिड़ते ही अकाउंटेंट प्रवीन कुमार कहते हैं, हम तो सुरक्षा के मुद्दे पर भाजपा के साथ हैं। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता दिनेश बेरोजगारी पर सवाल उठाते हैं। पर, यह भी कहते हैं कि विकल्प के अभाव में वे भाजपा के साथ हैं। वहीं, सरजू गुर्जर बताते हैं कि वह पहले भाजपा के साथ थे, पर अब सपा के साथ हैं।
कुछ दूर स्थित मेघदूतम पार्क में मिले लोग पास के ही फ्लैट में रहते हैं। चुनावी चर्चा पर वे बिना किसी लाग लपेट के कहते हैं, हम हिंदुत्व व राममंदिर के मुद्दे पर भाजपा के साथ हैं। चुनाव में मुद्दे क्या हैं, इस सवाल पर सेक्टर-50 में मिले दिनेश यादव कहते हैं, प्रदूषण और जाम की समस्या है। इन मुद्दों को उठाया तो जाता है, लेकिन समाधान कोई नहीं बताता। दिनेश कहते हैं, शहरी क्षेत्र में साइकिल की रफ्तार ज्यादा नहीं है, पर गांवों में मुसलमान व गुर्जर रफ्तार बढ़ा सकते हैं।
मुआवजे को लेकर सुलग रहे सवाल
जेवर और दादरी में जमीन के मुआवजे का सवाल भी सुलग रहा है। प्रेम प्रकाश भाटी कहते हैं, सपा सरकार में चार गुना मुआवजा देने की घोषणा हुई थी। भाजपा सरकार ने फाॅर्मूला बदल दिया। 2013 के अधिग्रहण कानून के हिसाब से मुआवजा नहीं दिया गया। कुछ ऐसा ही तर्क डाॅ. रूपेश वर्मा व सुनील चौधरी भी देते हैं। वे दावा करते हैं कि करीब 30 हजार किसानों को अभी तक ली गई जमीन के बदले भूखंड नहीं दिए गए हैं।
गुर्जर बहुल दादरी कस्बे में दोपहर के वक्त किसान हुक्के के साथ चुनावी चर्चा में मशगूल मिले। वोट के सवाल पर अधिवक्ता सुनील फौजी कहते हैं, किसानों को खेती से बेदखल कर दिया गया है। जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जमीन सरकारी प्रोजेक्ट में जाए तो मुआवजा मिलना चाहिए। पांच साल तक उम्मीद लगाए थे, लेकिन समाधान नहीं हुआ। इसलिए सपा के साथ रहेंगे।
जय कुमार भाटी कहते हैं, यहां सर्वाधिक विकास बसपा के कार्यकाल में हुआ। वह सवालिया लहजे में कहते हैं,...तो क्यों न हम उसके साथ रहें? महेश भाटी कहते हैं, हम तो भाजपा के साथ हैं। राम मंदिर बनना ऐतिहासिक कार्य है।
भट्टा-पारसौल में मुकदमे की चिंता
शाम करीब चार बजे हम भट्टा-पारसौल पहुंचे। गांव से पहले आवासीय प्लाॅटों का चिह्नांकन हो चुका है। नहर पार करते ही एक तरफ भट्टा, तो दूसरी तरफ पारसौल गांव है। गांव में प्रवेश करते ही हमें इंदर मिलते हैं। आंदोलन के दौरान वह भी जेल गए थे। किसानों पर ज्यादती की कहानी सुनाते हुए कहते हैं कि यहां कई के खिलाफ समन है। कचहरी के चक्कर लगा रहे हैं। वह कहते हैं, यहां भाजपा का जलवा है। कैसे? इस पर वह कहते हैं, भाजपा किसानों पर हुए मुकदमे वापस ले लेगी। नागेशपाल सिंह, जय प्रकाश भी भाजपा की वकालत करते हैं।
पर, राम किशन व जुगल किशोर छुट्टा पशुओं और महंगाई के मुद्दे पर भाजपा का विरोध करते हैं। बगल में खड़े मुश्ताक चुप रहते हैं। काफी कुरेदने पर बोलते हैं, गुर्जरों का साथ मिल रहा है। हम भी किसानों के हक के लिए सपा के साथ हैं।
विकास को अपने पैमाने पर तौल रहे
बसपा प्रमुख मायावती ने मुख्यमंत्री बनने पर 9 जून 1997 को गौतमबुद्धनगर जिले का गठन किया। पर, 2003 में सपा सरकार ने इसे भंग कर दिया। विरोध होने पर सरकार ने फैसला वापस लिया। बीटेक के छात्र संजीव नयन कहते हैं, गौतमबुद्धनगर जिला बनने से हर गांव को फायदा मिला है। इसलिए हम बसपा के साथ रहेंगे। मायावती ने बहुत काम किए हैं। कुछ ऐसा ही तर्क सुधांशु सिंह और नेतराम भी देते हैं।
सिकंदराबाद कस्बे में मिले हरिओम और पंकज सिंह कहते हैं, नोएडा, दादरी और जेवर में जितना विकास हुआ, उस अनुपात में सिकंदराबाद में नहीं हुआ। वह कहते हैं, हम बसपा के साथ हैं। साथ ही दावा करते हैं कि उनके क्षेत्र के ज्यादातर ठाकुर बसपा के साथ हैं।
मिले सहूलियत तो बढ़े पॉटरी उद्योग
खुर्जा पॉटरी मैन्यूफैक्चर एसोसिएशन के अध्यक्ष रवि राना कहते हैं कि एनसीआर में आने की वजह से पर्यावरण प्रदूषण सहित कई नियम कड़े हो गए। डीजल जनरेटर बंद हो गया। कारोबारी गैस जनरेटर नहीं खरीद पा रहे हैं, इसलिए छूट मिलनी चाहिए। कृष्ण गोपाल कहते हैं, आगरा में कारोबारियों को गैस पर सब्सिडी मिलती है, लेकिन खुर्जा में नहीं मिलती। आशीष पोद्दार और निखिल पोद्दार पॉटरी उद्योग से निकलने वाले अवशेष के लिए डंपिंग ग्राउंड की मांग करते हैं। वे बताते हैं कि ट्रांसपोर्ट में तमाम सामान टूट जाते हैं। ऐसे में जीएसटी 12 फीसदी से कम करने की भी जरूरत है।
ये हैं समर के योद्धा
डॉ. महेश शर्मा, भाजपा भाजपा ने दो बार से सांसद डाॅ. महेश शर्मा पर तीसरी बार दांव लगाया है। डाॅ. शर्मा और उनकी पत्नी चिकित्सक हैं। अपनी ही खींची लकीर लंबी करने की चुनौती है।
डॉ. महेंद्र नागर, सपा
कांग्रेस से सियासी सफर शुरू कर 2022 में साइकिल पर सवार हुए। गुर्जर समाज के डाॅ. महेंद्र नागर और उनके दोनों बच्चे चिकित्सक हैं। सपा और कांग्रेस के वोटबैंक को जोड़े रखने की चुनौती है।
राजेंद्र सोलंकी
बुलंदशहर निवासी राजेंद्र सोलंकी पूर्व विधायक हैं। बसपा के परंपरागत वोटबैंक के साथ ही ठाकुर मतदाताओं में सेंध लगाने की कोशिश। परंपरागत वोटबैंक के साथ अन्य जातियों को साधने की चुनौती है।
जातीय समीकरण
26,75,148 मतदाता हैं इस सीट पर
क्षत्रिय करीब 4.25 लाख
ब्राह्मण, गुर्जर 4-4 लाख
मुस्लिम 3.25 लाख
दलित 3.5 लाख
यादव और जाट 1-1 लाख हैं।
(इनपुट ग्रेटर नोएडा से मनोज भाटी)