डिवाइस के लिए एआईसीटी और केंद्र सरकार ने चार लाख रुपये की ग्रांट जारी की है। इसके साथ ही जल्द अब सफाईकर्मी इस डिवाइस को पहनकर ही सीवर व सैप्टिक टैंक की सफाई करते दिखाई देंगे।
सीवर और सेप्टिक टैंक में उतरने से पहले ही सफाईकर्मियों को पता चल जाएगा कि टैंक में जहरीली गैस तो नहीं है। मेरठ निवासी मोहित ने टॉक्सिक गैस डिटेक्शन इन सीवर एंड सेप्टिक टैंक नामक डिवाइस तैयार की है।
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अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में अपनी डिवाइस संग पहुंचे मोहित सरकारी आंकड़ों का हवाला देकर कहते हैं कि सेप्टिक टैंक में जहरीली गैस की वजह से देश में हर साल करीब 200 से अधिक सफाईकर्मियों की जान चली जाती है। जानमाल की हानि के साथ ही सरकार को प्रति व्यक्ति दस लाख रुपये की आर्थिक मदद करनी पड़ती है। इस डिवाइस के आने से सफाईकर्मियों को जान नहीं गंवानी पड़ेगी। इसके साथ ही सरकार को भी राजस्व का भी नुकसान नहीं होगा।
मोहित ने बताया कि उनकी कंपनी एमआईईटी इनक्यूबेशन फोरम में पंजीकृत है। पहले टैंक में उतरने से पहले सफाईकर्मियों को जहरीली गैसों की जानकारी नहीं मिल पाती थी। अब सफाईकर्मियों इन्हें जब पहनकर नीचे उतरेंगे तो उन्हें तत्काल वहां मौजूद गैस के बारे में पता चल जाएगा। इसके साथ ही ऊपर सुपरवाइज डिवाइस में नीचे मौजूद सभी गैसों की मात्रा भी पता चल जाएगी। यदि सीवर और सेप्टिक टैंक में सफाईकर्मियों को परेशानी आएगी तो तुरंत सुपरवाइज डिवाइस को देख रहे लोग सक्रिय होकर उन्हें बचा सकेंगे।
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एआईसीटी और केंद्र सरकार ने दिए चार लाख रुपये
डिवाइस के लिए एआईसीटी और केंद्र सरकार ने चार लाख रुपये की ग्रांट जारी की है। इसके साथ ही जल्द अब सफाईकर्मी इस डिवाइस को पहनकर ही सीवर व सैप्टिक टैंक की सफाई करते दिखाई देंगे। उन्होंने बताया कि इस डिवाइस की कीमत वर्तमान में 15 हजार रुपये है।