कैबिनेट के फैसले के मुताबिक, अमिताभ कांत समिति ने यह संस्तुति दी है कि बिल्डरों के ऊपर बकाये की सजा फ्लैट खरीदारों को न दिया जाए। ऐसे में बकायेदार बिल्डरों से बकाये की वसूली के लिए कठोर कदम उठाने को कहा गया है। जिन परियोजनाओं में बिल्डरों ने बकाये का भुगतान नहीं किया है उनसे रेरा वसूली करेगा। इस रकम से अधूरी परियोजनाओं को पूरा किया जाएगा। यही नहीं, वर्ष 2018 से पहले शुरू हो चुके व दो साल से ज्यादा की देरी वाली परियोजनाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी रेरा उठाएगा।
इसके अलावा बिल्डरों को अधूरी परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त फंड जुटाने में दूसरे बिल्डरों की मदद लेने की छूट दी गई है। इसके लिए बिल्डरों को प्राधिकरण से मंजूरी लेना आवश्यक नहीं होगा। बिल्डर चाहे तो किसी भी अन्य बिल्डर से परियोजना पूरी करने के लिए पैसे ले सकता है। यह उस पर निर्भर करता है कि वह उस बिल्डर को कैसे लाभ देगा। इसके अलावा बिल्डर को अपनी परियोजना के समय विस्तार के लिए मंजूरी मिलेगी। मंजूरी के लिए बकाया रकम के पूरे भुगतान की जरूरत नहीं होगी। खास बात यह कि बिल्डर चाहे तो अपनी बची या खाली जमीन को सरेंडर कर सकता है। सरेंडर करने के साथ ही जमीन पर बकाया और पेनाल्टी माफ कर दी जाएगी।
खरीदार खुद ही करा सकता है इंटीरियर
जिन इमारतों का ढांचा तैयार है लेकिन इंटीरियर अधूरा है। उन मामलों में फ्लैट आवंटी को खुद ही इंटीरियर कराने का विकल्प दिया जाएगा। इसके एवज में बिल्डर पर बकाया धन का भुगतान आवंटी नहीं करेगा। उसके पैसे इसमें एडजस्ट कर दिए जाएंगे।
केंद्र सरकार लेगी लोन की गारंटी
एमएसएमई की तर्ज पर अधूरे हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए कम ब्याज पर बिल्डर को लोन की सिफारिश भी की है। इस लोन की गारंटी केंद्र सरकार लेगी। समिति ने कहा कि रियल एस्टेट परियोजनाओं के मामले एनसीएलटी और दिवालिया एक्ट में जाने का विकल्प बिल्कुल अंत में रखा जाएगा।