संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे पंजाब के जिलों अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर, फिरोजपुर और फाजिल्का में नशा छुड़ाने के नाम पर चल रहा फर्जी धंधा अब खुलकर सामने आ गया है। युवाओं की लत छुड़ाने की आड़ में कई केंद्रों ने इसे मुनाफे का सौदा बना लिया।
जनवरी 2024 से सितंबर 2025 तक पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में करीब 280 केंद्रों की जांच की गई। इनमें से 97 केंद्र फर्जी या गैरकानूनी पाए गए। 82 को तुरंत सील किया गया, जबकि 15 पर जांच जारी है।
बिना डॉक्टर, बिना लाइसेंस, फिर भी चालू था ‘इलाज’
जांच में सामने आया कि अधिकतर केंद्रों में न तो प्रशिक्षित डॉक्टर थे, न साइकोलॉजिस्ट, न ही पंजीकृत काउंसलर। कई जगह तो मरीजों को बंद कमरों में बंधक बनाकर रखा गया। सरकारी रिकार्ड के मुताबिक, अब तक 230 से अधिक युवाओं ने शिकायत की है कि उनसे जबरन काम करवाया गया, मारपीट हुई और नशा छुड़ाने की जगह नींद की गोलियां व नशीले इंजेक्शन दिए गए। कई केंद्र धार्मिक या सामाजिक संगठनों के नाम पर चल रहे थे, पर न तो रजिस्टर्ड थे, न लाइसेंसधारी।
अमृतसर में सबसे ज्यादा फर्जी केंद्र
अमृतसर में 37
तरनतारन में 21
गुरदासपुर में 14
फाजिल्का में 11
फिरोजपुर में 9
नशा तस्करों से भी कनेक्शन
पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कई फर्जी केंद्रों का संबंध नशा तस्करी गिरोहों से भी जुड़ा मिला है। कुछ केंद्र नशे के अवैध कारोबार को छिपाने के लिए ‘फ्रंट’ के तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे थे।
सरकार सख्त, नए पंजीकरण के आदेश
राज्य सरकार ने सभी नशा छुड़ाओ केंद्रों को दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने के आदेश जारी किए हैं। अब बिना एमबीबीएस डॉक्टर और प्रशिक्षित काउंसलर के कोई भी व्यक्ति ऐसा केंद्र नहीं चला सकेगा।
फर्जी केंद्रों पर पूरी तरह लगेगी रोकर: डीजीपी
पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि नशा मुक्त पंजाब की दिशा में यह अभियान निर्णायक मोड़ पर है। आने वाले महीनों में सभी फर्जी केंद्रों पर पूर्ण रोक लगाई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।