फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सीएचसी में अल्ट्रासाउंड-एक्सरे की सुविधा ठप

विज्ञापन
सीएचसी के अल्ट्रासाउंड कमरे पर लटका ताला - फोटो : Mewat
विज्ञापन
अंतराम खटाना
विज्ञापन

नूंह। शहर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में करीब दो वर्षों से मरीज अल्ट्रासाउंड और एक्सरे की सुविधा
से वंचित हैं। इसके कारण जरूरतमंद और गंभीर मरीजों को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए निजी क्लीनिकों में रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। वहीं, शहर के आसपास दर्जनों गांवों से आए मरीज प्रतिदिन बिना अल्ट्रासाउंड जांच कराए वापस लौट रहे हैं। इन सुविधाओं के अभाव में गर्भवती महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। इस संबंध में क्षेत्र के लोगों ने अस्पताल प्रशासन को कई बार अवगत कराया है, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती के अभाव में यह परेशानी सबसे ज्यादा बढ़ गई है।
सीएचसी में गर्भवती महिलाओं के साथ-साथ एससी-एसटी, बीपीएल सहित सरकारी कर्मचारियों को फ्री अल्ट्रासाउंड की सुविधा दी गई है। जबकि, अन्य लोगों से 150 रुपये शुल्क लगता है। सीएचसी में सुविधा नहीं होने के कारण लोगों को नल्हड़ मेडिकल कॉलेज जाना पड़ रहा है। जहां कई दिनों बाद मरीजों का नंबर आता है।
विज्ञापन

जनप्रतिनिधि भी नहीं दे रहे ध्यान
जिला प्रशासन के अलावा जनप्रतिनिधियों को भी इस बारे में पूरी जानकारी है, लेकिन इस समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। इस कारण लोगों की यह समस्या लंबित पड़ी है। वहीं, नूंह सीएचसी के एसएमओ डॉ. संदीप राजपूत ने बताया कि इस बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया है। प्रयास है कि जल्द से जल्द समस्या का समाधान हो जाए।
----
प्रदेश सरकार का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। सरकार इस समस्या का तत्काल समाधान कराए। लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए प्रशासन को भी सोचना चाहिए।
- फकरुद्दीन एडवोकेट
-----
मेडिकल कॉलेज के अलावा जिले की सरकारी अस्पतालों में समस्याओं का अंबार है। सरकार को अवगत कराने के बावजूद भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा हैं।
- सनाउल्ला खान, कांग्रेसी नेता
-----
नूंह जिला प्रदेश में सबसे पिछड़ा है और यहां पर लोगों की आर्थिक स्थिति ज्यादा बेहतर नहीं है। सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की असुविधाओं पर ध्यान देना चाहिए।
विज्ञापन

- कमल पंवार, सरपंच इंडरी
-----
सरकारी अस्पतालों में अधिकतर गरीब लोग अपना इलाज कराने जाते हैं। लेकिन, यहां पर उन्हें पूरी सुविधा नहीं मिल पा रही है। इस कारण प्राइवेट अस्पतालों में उनकी जेब ढीली हो रही है।
- देशराज मास्टर, समाजसेवी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें