दादाजी दोबारा यूक्रेन नहीं भेजना चाहते
मोनिका ने बताया कि 15 फरवरी को भारतीय दूतावास की ओर से पहली चेतावनी दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि जिनको रुकना जरूरी नहीं है वह यूक्रेन से निकल जाएं। उनकी यूनिवर्सिटी में ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा नहीं थी। इसी वजह से उन्हें पढ़ाई के लिए रुकना पड़ा। दोबारा यूक्रेन जाने की बात पर पिता ने कहा कि माहौल ठीक होने पर पढ़ाई पूरी कराएंगे। वहीं दादा ने श्रीचंद अब दोबारा यूक्रेन भेजने के पक्ष में नहीं हैं।