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Noida News: युवाओं को तेजी से अपनी चपेट में ले रहा टाइप-2 मधुमेह

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-युवाओं में बढ़ रहा टाइप-2 मधुमेह, जिम्स में हर महीने 250 मरीज 35 वर्ष से कम उम्र के
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नितेश कुमार
युवाओं को तेजी से अपनी चपेट में ले रहा टाइप-2 मधुमेह

ग्रेटर नोएडा। कभी बढ़ती उम्र से जुड़ी बीमारी मानी जाने वाली टाइप-2 मधुमेह अब युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है। लंबे समय तक बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधि की कमी, जंक फूड और शर्करा युक्त पेय पदार्थों का अधिक सेवन इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। तनाव और अनियमित दिनचर्या भी जोखिम बढ़ा रही है। ग्रेटर नोएडा स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में हर महीने करीब 1200 मधुमेह मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें लगभग 250 की उम्र 35 वर्ष से कम है।
जिम्स के चिकित्सकों के अनुसार, टाइप-2 मधुमेह की शुरुआत में लक्षण कई बार हल्के होते हैं, इसलिए युवा इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक प्यास और भूख लगना, बिना कारण वजन कम होना, लगातार थकान, धुंधला दिखाई देना और घाव का देर से भरना इसके संकेत हो सकते हैं। कुछ लोगों में त्वचा पर बार-बार संक्रमण या खुजली की समस्या भी दिखाई देती है। ऐसे लक्षण लगातार बने रहने पर ब्लड शुगर की जांच करानी चाहिए।
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जिम्स के मेडिसिन विभाग के सह-आचार्य डॉ. दीपक शर्मा ने बताया कि लंबे समय तक ब्लड शुगर नियंत्रित नहीं रहने पर हृदय, गुर्दे, आंखों और नसों पर असर पड़ सकता है। पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन की शिकायत भी हो सकती है। कम उम्र में बीमारी की शुरुआत होने पर लंबे समय तक इसके प्रभाव झेलने पड़ सकते हैं।



हर सप्ताह 300 मरीजों की जांच

डॉ. शर्मा ने बताया कि जिम्स में हर सप्ताह करीब 300 मधुमेह मरीज देखे जा रहे हैं। इनमें लगभग 20 प्रतिशत यानी करीब 60 मरीज 35 वर्ष से कम उम्र के होते हैं। इसी आधार पर महीने में युवा मरीजों की संख्या करीब 250 तक पहुंच रही है।
सक्रिय जीवनशैली अपनाने की सलाह

चिकित्सकों के अनुसार, युवाओं को रोजाना शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। लगातार बैठकर काम करने के बजाय बीच-बीच में उठकर चलना और नियमित पैदल चलना या अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम करना फायदेमंद हो सकता है। खानपान में सब्जियां, दालें और साबुत अनाज आदि शामिल करना चाहिए। मीठे खाद्य पदार्थों, शर्करा युक्त पेय और तले-भुने भोजन का सेवन सीमित रखना जरूरी है।
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अधिक वजन वाले, परिवार में मधुमेह का इतिहास रखने वाले और निष्क्रिय जीवनशैली अपनाने वाले लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए। चिकित्सकीय सलाह के अनुसार समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच, संतुलित खानपान और नियमित व्यायाम से बीमारी के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
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