नोएडा। दस वर्ष पहले जिले में आशियाने का सपना देखकर बुकिंग कराने के बाद करीब दो लाख फ्लैट खरीदारों ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उन्हें अलग-अलग अदालतों के चक्कर भी काटने पड़ेंगे। साथ ही, प्राधिकरण और बिल्डरों के बीच ब्याज के मामलों को झेलना पड़ेगा। आलम यह है कि सौ प्रतिशत राशि ले चुके बिल्डरों की दिवालिया प्रक्रिया के दौरान खरीदारों को अपने पैसे के लिए क्लेम भी करना होगा।
आगे आने वाला समय फ्लैट खरीदारों के लिए और कठिन होता जाएगा। रोजाना नई-नई मुसीबतें इस बात की गवाही दे रही हैं। सुपरटेक लिमिटेड के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया चलने के बाद अन्य बिल्डर परियोजनाओं के फ्लैट खरीदारों के भी कान खड़े हो गए हैं। उनकी ओर से वकीलों से बातचीत की जा रही है। सुपरटेक लिमिटेड के खरीदार वकीलों के चक्कर लगा रहे हैं और इससे निकलने का गणित समझ रहे हैं।
बिल्डरों को छोटी-छोटी बकायेदार एजेंसियों से सता रहा भय
बिल्डरों की संस्था नेशनल रियल एस्टेट डेवलपर कंपनी (नारेडको) का कहना है कि प्राधिकरण उनकी जमीन के मसले को नहीं सुलझा रहा है। ऐसे में उनकी देनदारी अलग-अलग एजेंसियों पर बनी हुई है। अब कोई भी एजेंसी ऐसी सूरत में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) जा सकती है और बिल्डर पर दिवालिया प्रक्रिया शुरू हो सकती है। सुपरटेक लिमिटेड के खिलाफ संबंधित बैंक ने ही एनसीएलटी में याचिका दायर की थी और यह याचिका मंजूर हो गई। इसके बाद इस पर दिवालिया प्रक्रिया चलने लगी। अब ट्विन टावर के मामले में पहले से फंसे खरीदारों को अलग से इंटरिम रिजोल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) के पास क्लेम करना होगा, जबकि सुप्रीम कोर्ट की ओर से ऐसे खरीदारों को उनकी बकाया रकम चुकाने को कहा गया था। सुपरटेक के कई अन्य प्रोजेक्ट भी इस दायरे में आ रहे हैं। उनके खरीदार भी एनसीएलटी में क्लेम करने के लिए आगे आ रहे हैं, इन्हें वरिष्ठ वकील कुमार मिहिर रास्ता दिखा रहे हैं। सुपरटेक के मामले में करीब 20 हजार फ्लैट खरीदार पहले से फंसे हुए हैं।
5 साल से एनसीएलटी की प्रक्रिया झेल रहे जेपी के 25 हजार खरीदार
25 हजार फ्लैट खरीदार जेपी बिल्डर की परियोजनाओं में फंसे हुए हैं। इनके लिए 2017 से एनसीएलटी में सुनवाई चल रही है। खरीदार आशीष मोहन गुप्ता ने बताया कि इसमें पहली बार समाधान योजना पर बहस चल रही है। यहां अभी तक निर्माण को लेकर एजेंसी और आईआरपी के बीच मंथन जारी है। हालांकि, इस बीच आईआरपी के माध्यम से कुछ फ्लैटों को पूरा कराया गया, लेकिन अभी भी अधिकांश फ्लैट खरीदार इस परियोजना में मुसीबत के शिकार हैं।
ब्याज के मामले में फंसे डेढ़ लाख खरीदार
नोएडा-ग्रेनो प्राधिकरणों के बीच ब्याज के मामले में करीब डेढ़ लाख खरीदार बुरी तरह से फंसे हुए हैं। बिल्डर इस बात पर अड़े हैं कि प्राधिकरण ब्याज कम करे तो वह पैसे जमा कराएंगे। वहीं, प्राधिकरण अड़ा है कि ब्याज की राशि कम नहीं करेगा। ऐसे में मामला सुप्रीम कोर्ट में है और फैसला सुरक्षित है। ऐसे में फ्लैट खरीदार कब्जा और रजिस्ट्री की राह तक रहा है।
आम्रपाली के 40 हजार फ्लैट खरीदार भी इंतजार में
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आम्रपाली की सभी परियोजनाओं का काम नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड कर रहा है। इस बाबत आम्रपाली के खरीदार केके कौशल का कहना है कि काफी लेटलतीफी हो चुकी है। ग्रेनो के हजारों फ्लैट खरीदार अभी भी फंसे हुए हैं। हालांकि, बैंकों के कंसोर्टियम की ओर से कुछ फंड रिलीज किया गया है, लेकिन इस परियोजना की गति भी काफी धीमी है। इसी तरह से यूनिटेक भी एनसीएलटी में जा चुका है। उसके भी फ्लैट और व्यावसायिक संपत्ति के खरीदार फंसे हुए हैं।