नोएडा। ट्विन टावर गिराने की दिशा में एक बार फिर से तेजी आ गई है। बिल्डर द्वारा सुझाई गई कंपनी की कार्ययोजना का सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) ने अवलोकन कर लिया है। सीबीआरआई ने छह सुझाव प्राधिकरण को दिए हैं। इनको कंपनी अपनी कार्ययोजना में शामिल करेगी। प्राधिकरण ने इन सुझावों को बिल्डर को भेज दिया है। अब बिल्डर जल्द ही उपरोक्त कंपनी के साथ अनुबंध कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट की समयसीमा बीतने के बाद सुपरटेक बिल्डर की ओर से अमेरिकी कंपनी एडफिस की कार्ययोजना प्राधिकरण को सौंपी गई थी।
कंपनी के अधिकारियों ने बताया था कि इससे पहले वह जोहान्सबर्ग में 108 मीटर ऊंची इमारतों को ध्वस्त कर चुके हैं। वहां भी एक इमारत से दूसरी की दूरी मात्र आठ मीटर थी। जबकि, ट्विन टावर की ऊंचाई करीब 100 मीटर है और इनके बीच की दूरी भी 9 मीटर है। कंपनी ने कार्ययोजना में बताया था कि टावर को ‘वाटरफॉल इंप्लोजन कोलैप्स मैकेनिज्म’ से ढहाया जाएगा। यह पूरी तरह से कंट्रोल ब्लास्ट होगा। इसमें बिल्डिंग ठीक उसी प्रकार एक ओर गिरती चली जाएगी, जैसे किसी झरने से पानी गिरता है। कंपनी ने बताया कि टावर तोड़ने की तैयारी में करीब तीन माह का समय लगेगा। पूरी तैयारी होने के बाद मात्र दस सेकेंड में ही इमारत मलबे में तब्दील हो जाएगी। मलबा साफ करने में भी करीब तीन माह का ही समय और लगेगा।