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संशोधित : तीसरी मंजिल से गिरकर तीन साल के मासूम की मौत, हंगामा

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तीसरी मंजिल से गिरकर तीन साल के मासूम की मौत, हंगामा
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परिजनों ने पैसे जमा नहीं करने पर उपचार में देरी का आरोप लगाया
सूरजपुर कस्बे में निर्माणाधीन मकान में तीसरी मंजिल पर खेलते समय हुआ हादसा
इलाज के दौरान तोड़ा दम, परिजनों ने मामले में नहीं दी शिकायत
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। कस्बा सूरजपुर में शुक्रवार को तीन वर्षीय मासूम की तीसरी मंजिल से गिरकर मौत हो गई। मृतक की पहचान गगन (3) के रूप में हुई है। सूरजपुर कोतवाली पुलिस मामले की जांच कर रही है। परिजनों ने पैसे जमा नहीं करने पर इलाज में देरी का आरोप लगाया। अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि बच्चे का समय रहते इलाज शुरू कर दिया गया था। डॉक्टरों ने बच्चे की जान बचाने का पूरा प्रयास किया था।
जानकारी के अनुसार, हमीरपुर निवासी अशोक परिवार के साथ सूरजपुर कस्बे में किराये के मकान में रहते हैं। वह दिहाड़ी काम कर परिवार चलाते हैं। शुक्रवार को वह बच्चे को साथ लेकर काम पर गए हुए थे। जिस निर्माणाधीन मकान में काम कर रहे थे, उसकी तीसरी मंजिल से खेलते समय नीचे गिर गया। बच्चे के गिरते ही वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। गंभीर रूप से घायल बच्चे को शारदा अस्पताल ले गए। हालत गंभीर होने के कारण इलाज के दौरान मासूम ने दम तोड़ दिया। बच्चे की मौत की खबर मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। आरोप है कि अस्पताल प्रशासन की ओर से बच्चे के उपचार में आई लागत मांगी गई थी। इस दौरान परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पर नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंची और घटना की जानकारी ली। परिजनों को किसी तरह से शांत कराकर घर भेजा। पुलिस बच्चे का पोस्टमार्टम कराना चाहती थी लेकिन परिजनों ने मना कर दिया। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। कोतवाली प्रभारी विनोद कुमार का कहना है कि मामले में कोई शिकायत नहीं मिली है।
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करीब एक से डेढ़ घंटे तक कोई उपचार नहीं किया गया

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने पर स्टाफ ने पहले 28 हजार रुपये जमा कराने की बात कही। उन्होंने अनुरोध किया कि वह पैसे की व्यवस्था कर रहे हैं लेकिन पहले बच्चे का इलाज शुरू कर दिया जाए। इसके बाद एक अन्य स्टाफ ने बताया कि बच्चे के इलाज में रोजाना करीब 70 हजार रुपये का खर्च आएगा और पहले पैसे जमा करने को कहा गया। इस कारण करीब एक से डेढ़ घंटे तक कोई उपचार नहीं किया गया। बाद में बताया गया कि बच्चे की मौत हो चुकी है। बच्चे को न तो कोई प्राथमिक उपचार दिया गया और न ही कोई पट्टी की गई। अगर समय पर इलाज मिलता तो शायद जान बच सकती थी।
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कोट्स
बच्चे का समय रहते इलाज शुरू कर दिया गया था। डॉक्टरों ने बच्चे की जान बचाने का पूरा प्रयास किया। परिजनों से एक भी रुपये जमा नहीं कराए गए थे। परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। -डॉ अजीत कुमार, निदेशक जनसंपर्क, शारदा अस्पताल
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