अमर उजाला माय ज्योतिष महाकुंभ पहुंचे केंद्रीय मंत्री, कहा, आक्रांताओं ने भारत के ज्ञान को नष्ट किया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। मयूर विहार के क्राउन प्लाजा होटल में सोमवार को अमर उजाला माय ज्योतिष महाकुंभ का आयोजन हुआ। इसमें देश-विदेश के नामचीन ज्योतिषविदों के साथ बड़ी संख्या में इस विधा के विद्वान मौजूद रहे। एक दिवसीय महाकुंभ के अलग-अलग सत्रों में ज्योतिष पर संपूर्णता से चर्चा हुई। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी शिरकत की।
मंच से संबोधित करते हुए गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि यह सांस्कृतिक उत्कर्ष का कालखंड है। अब भारत के हर क्षेत्र की प्रमाणिकता नए सिरे से परिभाषित होने वाली है। हमारी ज्ञान परंपरा, वैज्ञानिक तथ्यों और अनुसंधान पर आधारित थी। हमारे ऋषियों ने समझाया कि ग्रहों की चाल सिर्फ ब्रह्मांड को ही नहीं हमारे जीवन को प्रभावित करती है। ग्रहों की खोज हमारे ऋषियों ने वर्षों पहले कर दी थी इसलिए आज हम सटीक भविष्यवाणी कर पाते हैं। हमारे वेद, विज्ञान, लोक परंपरा की स्वीकार्यता अब बढ़ रही है।
केंद्रीय मंत्री ने महाकुंभ में आए सभी ज्योतिषियों और इस वैज्ञानिक प्रणाली के साधकों का अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि यह मंच केवल एक विधा से जुड़े लोगों को संकलित करने का ही माध्यम नहीं है। भारत का पुनर्जागरण हो रहा है तो ऐसे महत्वपूर्ण कालखंड में अमर उजाला के कार्यक्रम का आयोजन नई गति प्रदान करेगा। आज हम विरासत पर गर्व करते हुए विकसित भारत की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में भारत की आध्यात्मिक चेतना और सनातन परंपरा बढ़ रही है। उसे विश्वभर में पहचान मिल रही है। यह आयोजन हमारी सांस्कृतिक चेतना का पुनर्जागरण है। यह हमारे अतीत की गहराई, वर्तमान की प्रामाणिकता और भविष्य की दिशा का संगम है।
हमारा वैदिक ज्ञान विज्ञान के आधार पर विकसित हुआ
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमारा वैदिक ज्ञान विज्ञान के आधार पर विकसित हुआ है। पांडुलिपियां हमारी धरोहर हैं। इनको संजोने वालों को प्रणाम करता हूं। पांडुलिपियों का सरकार डिजिटलाइजेशन करेगी। इन्हें हम एआई रीडेबल प्रारूप में लाएंगे ताकि ज्ञान विश्व भर को मिले। इससे भारत के ऋषियों मुनियों के ज्ञान की परिपवक्ता विश्व के पटल पर आएगी और विश्व में भारत का मान बढ़ेगा। आपके पास अगर ऐसी पांडुलिपि है तो सरकार को दें। सरकार उनका संरक्षण करेगी। हमें एआई की प्रमाणिकता पर भी बात करनी चाहिए ताकि यह तकनीक हमारी ज्ञान परंपरा की प्रमाणिकता को प्रभावित न करे।
ऋषियों के ज्ञान ने भारत और विश्व को नई दिशा दी
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्राचीन समय में भारत में जो लोग आए उन्होंने आक्रांता बनकर भारत के ज्ञान को नष्ट किया। लाखों पुस्तकों और पुस्तकालय को जला दिया गया। हमारे ज्ञान विज्ञान के केंद्र नष्ट कर दिए गए। लगातार जब ऐसा हुआ तो भारत में स्मृति की परंपरा स्थापित हुई। मनीषियों ने श्रुति और स्मृति के आधार पर ज्ञान परंपरा को बरकरार रखा। भारत में हमारे धर्म में प्रेम, करुणा को निश्चित महत्ता दी है। ऋषियों के ज्ञान ने हमारे भारत और विश्व को नई दिशा दी। भारत का उत्कर्ष अवश्यंभावी है। जब ऐसा होगा तो भारत की विधाओं का नए सिरे से सम्मान होगा।
भारत के ज्ञान को मिल रही स्वीकार्यता
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि योग को विश्वभर ने अपनाया। योग की वैज्ञानिकता, उपादेयता और उपयोगिता प्रमाणित हुई है। विश्व भर के लोग योग को अपना रहे हैं। भारत की संस्कृत को विश्व की वैज्ञानिक भाषा माना गया है। 100 विश्वविद्यालयों में संस्कृत विभाग है। संस्कृत में शोध हो रहे हैं। ऐसे ही कृषि पद्धति और गो-आधारित खेती की प्रमाणिकता बढ़ रही है। भारत के ज्योतिष, खगोल विद्या व ग्रह परिचालन विधा की स्वीकार्यता अब मिल रही है। भारत की आध्यात्मिक चेतना और सनातन परंपरा बढ़ रही है।
हर घर पानी पहुंचाने का संकल्प
शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में एक नए मंत्रालय जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया गया था। जल से जुड़े विभागों का समन्वय करके इस मंत्रालय का निर्माण किया गया। मुझे उस मंत्रालय में सेवा करने का मौका मिला। प्रधानमंत्री ने हर घर में पेयजल पहुंचाने के संकल्प और विकसित भारत के लक्ष्य के साथ जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया था।