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Noida News: तीस वर्षीय ड्रेनेज मास्टर प्लान दिलाएगा जलभराव से मुक्ति

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पांच चरणों की योजना तैयार, गंभीर समस्या वाले स्थानों पर पहले शुरू होगा काम
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21958 किमी लंबा है दिल्ली में नालों का नेटवर्क
8 अलग-अलग एजेंसियों के पास है जिम्मेदारी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। बारिश के दिनाें में जलभराव से जूझने वाली राजधानी के लिए प्रदेश सरकार ने नया ड्रेनेज मास्टर प्लान तैयार किया है। अगले 30 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर योजना बनाई गई है। इससे पहले वर्ष 1976 में व्यापक ड्रेनेज योजना तैयार हुई थी। उस समय दिल्ली की आबादी करीब 60 लाख थी जबकि अब यह संख्या दो करोड़ के करीब पहुंच चुकी है। लगातार बढ़ते शहरीकरण, बदलते मौसम और बार-बार जलभराव की समस्याओं के बीच नए मास्टर प्लान को शहर की बेहद अहम जरूरत माना जा रहा है।
राजधानी में कुल 21958 किमी लंबा नालों का नेटवर्क है। इसकी जिम्मेदारी 8 अलग-अलग एजेंसियों के पास है। इनमें लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, नगर निगम (एमसीडी), नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) प्रमुख हैं। पूरे शहर को तीन बेसिन नजफगढ़, बारापुला और ट्रांस-यमुना में बांटा गया है। इनका ड्रेनेज नेटवर्क नए सिरे से डिजाइन करने का जिम्मा अलग-अलग कंसल्टेंट कंपनियों को दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, सभी तीन बेसिनों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार हो चुकी है। सरकार से मंजूरी मिलते ही निजी कंपनियों से निविदाएं आमंत्रित कर कार्य शुरू किया जाएगा।
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57,362 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान
योजना के अनुसार, तीनों बेसिनों में काम पांच चरणों में पूरा किया जाएगा। सबसे पहले उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां जलभराव की समस्या सबसे गंभीर है। पहले चरण में नजफगढ़, सप्लीमेंट्री, मंगेशपुर, किराड़ी सुलेमान नगर, सुल्तानपुर, अलीपुर लिंक, बिजवासन, कैलाश नगर और तैमूर नगर जैसे बड़े नालों का पुनर्निर्माण होगा। सभी चरणों पर कुल खर्च करीब 57,362 करोड़ रुपये अनुमानित है।
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56.1 मिमी प्रति घंटे की वर्षा को संभालेगा सिस्टम
अधिकारियों ने बताया कि नए मास्टर प्लान के तहत ड्रेनेज सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे कम-से-कम 56.1 मिमी प्रति घंटे की वर्षा को संभाल सकें। साथ ही, जलवायु परिवर्तन के कारण अनुमानित 11 फीसदी अतिरिक्त बारिश को ध्यान में रखकर भी क्षमता बढ़ाई जाएगी। सेकेंडरी नालों को 5 साल में आने वाले बारिश चक्र को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाएगा। प्राइमरी नालों के लिए 25 साल और बड़े पुलों व क्रॉस-ड्रेनेज स्ट्रक्चर के लिए 50 साल के डिजाइन को आधार बनाया गया है। योजना में वाटरबॉडी को नालों से जोड़ने, लो-लाइंग इलाकों में पंपिंग स्टेशन बनाने और पार्कों व हरित क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन जैसी तकनीक शामिल की गई हैं।
नया मास्टर प्लान इसलिए जरूरी

- दिल्ली का मौजूदा ड्रेनेज सिस्टम पुराना है और आज की जरूरतों के लिए अपर्याप्त है।

-सड़क नेटवर्क के साथ उचित ड्रेनेज व्यवस्था का अभाव।

-कई नालों के प्राकृतिक मार्ग पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण।

-नालों के बीच पर्याप्त इंटरकनेक्टिविटी का अभाव।

-कई जगह सीवर और वर्षा जल नालों के मिल जाने से गंभीर स्वास्थ्य खतरे।

-बाढ़ के समय आपात जरूरतों के हिसाब से टुकड़ों में किए गए निर्माण।
-नालों में गाद और ठोस कचरे की वजह से क्षमता में कमी।


यह हैं प्रमुख लक्ष्य

-तीन वर्षों में जलभराव की घटनाओं को कम-से-कम 50% घटाना।

-पांच वर्षों में बाढ़ से होने वाली दुर्घटनाओं और बीमारियों में 30% की कमी।

-चार साल में बाढ़ से होने वाले आर्थिक नुकसान को 40% तक घटाना।

-पांच वर्षों में नालों से निकलने वाले पानी की गुणवत्ता में 20% सुधार।

-अगले एक वर्ष में जलभराव प्रभावित क्षेत्रों की 60% आबादी को जागरूक करना।

-योजना की सबसे अहम विशेषता यह है कि इसमें जलभराव कम करने के साथ-साथ भूजल रिचार्ज और जल संरक्षण पर भी ध्यान दिया गया है।

-वर्षा जल को झीलों, तालाबों और वेटलैंड में भेजने की व्यवस्था होगी।

-रेन वाटर हार्वेस्टिंग को हरित क्षेत्रों और खुले स्थानों में लागू किया जाएगा।

-आने वाले पांच वर्षों में कम-से-कम 10% नए प्रोजेक्ट में ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर अनिवार्य किया जाएगा।
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