जेवर/ग्रेटर नोएडा। नाबालिग अवस्था में दिल्ली के जामिया में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में चल रहे प्रदर्शन के दौरान फायरिंग करने वाला राम भक्त गोपाल हरियाणा के पटौदी में भड़काऊ बयान देने के बाद एक बार फिर चर्चा में है। हालांकि, अब उसने बयान के संबंध में स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि लड़कियों को उठाने का मतलब ब्याह (शादी) से था। ‘उठाने’ शब्द का इस्तेमाल उसने आवेश और अज्ञानता में आकर किया था।
चार जुलाई को हरियाणा के पटौदी में लव जेहाद और धर्मांतरण पर हुई पंचायत में जेवर निवासी गोपाल को भी आमंत्रित किया गया था। पंचायत में गोपाल ने धर्म विशेष की लड़कियों को उठाने आदि की बात कही थी। इससे पहले गोपाल को 30 जनवरी 2020 को दिल्ली स्थित जामिया के बाहर सीएए के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन के दौरान फायरिंग करने पर गिरफ्तार किया गया था। तब गोपाल की आयु 17 वर्ष थी। अब पंचायत में बयान के बाद गोपाल ने कहा कि देश और धर्म के समर्थन में बोलना किसी को बुरा लगता है तो इसमें मेरा कोई दोष नहीं है।
मैं देश और धर्म विरोधी लोगों के खिलाफ हूं। उसने कहा कि जब ओवैसी 15 मिनट के लिए पुलिस हटाने का बयान देते हैं। जामिया और शाहीन बाग में जब भड़काऊ नारे लगते हैं तो कुछ नहीं होता। मैं हिंसा का समर्थन नहीं करता और न ही इसे समाधान समझता हूं। मैं संविधान में विश्वास रखता हूं। जामिया के बाहर फायरिंग का मामला कोर्ट में विचाराधीन हैं। हरियाणा की पंचायत में दिया मेरा पूरा बयान सुनिए। मैंने उसमें कहा है कि बहन-बेटियों को सम्मान के साथ सनातन धर्म में लाओ और उन्हें आजादी दिलाओ। देश में ऐसी महिलाएं भी हैं, जिन्होंने घर के बाहर से सूरज भी नहीं देखा। उठा ले जाने शब्द का प्रयोग मैंने गलती से किया, उठाने का मतलब ब्याह (शादी) करने से था।