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Noida News: दूसरों को पढ़ाते सरकारी स्कूल आने के पाठ... गुरुजी को पसंद निजी के ठाठ

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जिले के 460 परिषदीय स्कूलों में 2300 शिक्षक कार्यरत, केवल एक-दो के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे
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यही शिक्षक घर-घर जाकर लोगों से बच्चों को सरकारी स्कूल में भेजने की करते हैं अपील
नेहा शर्मा

नोएडा। जिले के परिषदीय स्कूलों में सिर्फ एक-दो स्थायी शिक्षक का बच्चा अध्ययनरत है। ऐसा हाल तब है जब यही शिक्षक घर-घर जाकर अभिभावकों से बच्चों को निजी की जगह सरकारी स्कूलों में भेजने की अपील करते हैं। उन्हें सरकारी स्कूलों में मिलने वाली सुविधाएं बताते हैं। सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से लगातार अभियान भी चलाए जा रहे हैं, जिनकी मॉनिटरिंग प्रशासन करता है। लेकिन, जिनके ऊपर सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने का दारोमदार है, वे ही अपने बच्चों का नामांकन यहां नहीं करा रहे हैं। इससे समाज में गलत संदेश जा रहा है। लोग भरोसा नहीं कर पा रहे हैं कि सरकारी स्कूलों में दी जा रही शिक्षा से उनके बच्चों का भविष्य उज्ज्वल होगा। लोगों का कहना है कि अगर सरकारी स्कूलों में अच्छी पढ़ाई होती तो शिक्षक अपने बच्चे का नामांकन क्यों नहीं कराते?
जिले में करीब 460 परिषदीय विद्यालय हैं, जहां लगभग 2300 शिक्षक कार्यरत हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार इनमें 40 प्रतिशत ऐसे शिक्षक हैं, जिनके बच्चे छोटे हैं। बच्चों की देखभाल और शिक्षा से जुड़े कारणों से हर महीने 25 से 30 शिक्षिकाएं चाइल्ड केयर लीव (सीसीएल) भी ले रही हैं।
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तमिलनाडु से सीख लेने की जरूरत
हाल ही में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने अपनी पार्टी के सभी विधायकों और मंत्रियों को निर्देश दिया है कि वे अपने बच्चों को निजी के बजाय सरकारी स्कूलों में पढ़ाएं। इस नीति की शुरुआत करते हुए उनकी पार्टी के विधायक ने अपनी बेटी का दाखिला सरकारी स्कूल में कराया है। वहीं, गौतमबुद्ध नगर जिले के परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक सरकार से मोटी तनख्वाह व सुविधाएं तो लेते हैं, लेकिन अपने बच्चों को सरकारी विद्यालयों में पढ़ाने से हिचकिचाते हैं। शिक्षकों के इस रवैये पर प्रश्न करने पर अधिकारी इसे उनका व्यक्तिगत निर्णय बताते हैं।



लगातार अपग्रेड हो रहे स्कूल
बेसिक शिक्षा विभाग लगातार स्कूलों को अपग्रेड कर रहा है। स्कूलों में निपुण भारत मिशन, पुस्तकालय, खेल सामग्री, टीएलएम, स्मार्ट क्लास और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है, लेकिन शिक्षक यहां अपने बच्चों का नामांकन कराने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे। हालांकि, शिक्षक इसे केवल गुणवत्ता से जोड़कर देखने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि अंग्रेजी माध्यम, परिवहन सुविधा, सह पाठ्यक्रम गतिविधियों जैसे कारणों से वे निजी विद्यालय चुनते हैं।
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कोट

किस विद्यालय में बच्चे को पढ़ाना है, यह पूरी तरह अभिभावक और शिक्षक का व्यक्तिगत निर्णय है। मेरी जानकारी में एक-दो शिक्षक ऐसे हैं, जिनके बच्चे परिषदीय विद्यालय में पढ़ रहे हैं। विभाग लगातार सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था और सुविधाओं में सुधार के लिए काम कर रहा है। -राहुल पंवार, बेसिक शिक्षा अधिकारी
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