गाजियाबाद। पहली बार इंडस्ट्री में प्रयोग होने वाले अग्निरोधक कपड़ो की गुणवत्ता की जांच देश में होगी। इसके लिए संजयनगर स्थित निट्रा (नॉर्दन इंडिया टेक्सटाइल रिसर्च एसोसिएशन) में मैनिकिन मशीन लगाई गई है। अब तक इस प्रकार की जांच के लिए कपड़ों को बाहर भेजा जाता था। शनिवार को केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने इस उपकरण की शुरुआत की। उन्होंने बताया कि यह देश की पहली यूनिट है।
-मजदूर होंगे सुरक्षित-
लोहा, स्टील, तेल, गैस, पेट्रोलियम, रेलवे, केमिकल्स समेत अन्य उद्योग में काम करने वाले लोगों को अग्निरोधक कपड़े दिए जाते हैं। इन कपड़ों को तैयार करने के बाद अभी उसकी जांच अमेरिका में होती थी। निट्रा में लगी मैनिकिन ज्वाला समाविष्ट परीक्षण मशीन से अब इनकी जांच देश में होगी।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यह मशीन वैश्विक मानकों के अनुसार काम करती है। इसमें अलग-अलग प्रमाणपत्र दिए जाएंगे। मशीन में एक अग्निरोधक कपड़े पहने हुए मैनिकिन को रखा जाता है। उसे आग के संपर्क लाया जाता है। संपर्क में आने के बाद 100 थर्मल सेंसर आग में कपड़ों के माध्यम से मानव शरीर के विभिन्न हिस्सों में प्रभाव मापते व गणना करते हैं। इस परीक्षण में कपड़े से आग पर शरीर पर कितनी देर में प्रभाव आएगा, इसकी भी जानकारी मिलेगी।
दावा है कि यह मशीन साथ ही फ्लैश फायर की स्थिति में मानव शरीर, कपड़ों और पर्यावरण के बीच गर्मी के आदान-प्रदान को जल्दी, सटीक जानकारी दे सकती है। डॉ.एमएस परमार ने बताया कि इस प्रक्रिया से हम एक निष्कर्ष पर पहुंच सकते हैं कि किस तरह की इंडस्ट्री में हमारे मजदूरों और कर्मचारियों को किस-किस तरह के सुरक्षात्मक कपड़ों की जरूरत है।
-मिल्कवीड फाइबर ने विश्व में बनाया नाम-
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मिल्कवीड के साथ तैयार प्राकृतिक फाइबर विश्व में अलग पहचान रखता है। चीन भी इस मामले में हमारे आसपास नहीं है। उन्होंने बताया कि इस ऑक या मिल्कवीड पाैधे को लेकर निट्रा में शोध हुआ था जो आज कई उद्योगों तक पहुंचा और इससे कपड़े तैयार किए जा रहे हैं। बताया कि यह पकड़ा माइनस 40 डिग्री में काम करता है। वह खुद कुछ समय पहले जर्मनी गए थे और साथ में मिल्डवीड फाइबर से तैयार जैकेट और कैप लेकर गए थे। माइनस आठ डिग्री में बाहर होने पर भी ठंड का एहसास नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अमेरिका तक इसकी मांग कर रहा है।
निट्रा महानिदेशक के डॉ.एमएस परमार ने बताया कि इस खेती में देश के कई संस्थान भी भी योगदान दे रहे हैं। इस फाइबर की विशेषताओं की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी तारीफ कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि देश के हिस्सों से लाए बीजों के द्वारा सैकड़ों बीघा में खेती करके जांच की जा रही है, ताकि इस फसल का आर्थिक, पर्यावरण, मृदा और सामाजिक आंकलन किया जा सके। टेक्सटाइल उद्योग को लेकर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्तमान में यह उद्योग 180 बिलियन डाॅलर का है, जिसे 350 बिलियन डाॅलर तक लेकर जाने की तैयारी है।