शहर के खोखर टोला में ड्रग विभाग की टीम गई थी जांच करने
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। नशीली दवाइयों की जांच से शहर में धंधेबाजों के काले कारनामे अब सामने आने लगे हैं। ताजा मामला शहर के खोखर टोला इलाके का है। यहां ड्रग विभाग को जिस दुकान से नशीली दवाओं के धंधेबाजी की सूचना थी, वह दुकान खुलती ही नहीं है। बस ऑनलाइन किराया जमा होता है। एनए फार्मा नाम की इस दुकान पर शनिवार को टीम गई तो वहां शटर बंद मिला।
आसपास के लोगों ने बताया कि यह दुकान लंबे समय से नहीं खुली है। दुकान के मालिक ऑनलाइन किराया भुगतान कर रहा है। ड्रग विभाग की टीम को फुटकर दुकान के लाइसेंस पर भारी मात्रा में नशीली दवाओं के सप्लाई की सूचना मिली थी, जिसकी जांच हो रही है। दुकान संचालक बिहार का रहने वाला है। इस दुकान को भी लखनऊ और दिल्ली से नशीली दवाओं की बड़ी खेप मिलती थी। दस्तावेजों से पता चला कि उसने लखनऊ स्थित बायो हब लाइफ साइंसेज प्राइवेट लिमिटेड से करीब 20 हजार ट्रामाडोल टैबलेट और लगभग चार हजार बोतल कोडीनयुक्त कफ सिरप खरीदा था। जांच में पता चला कि दुकान पिछले कई महीनों से बंद है।
जांच करने गई ड्रग विभाग की टीम में सहायक आयुक्त औषधि पूरनचंद और ड्रग इंस्पेक्टर अरविंद यादव शामिल थे। दुकान संचालक इरफान को विभाग की तरफ से नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है, लेकिन उसने अपना पक्ष भी नहीं रखा है। विभाग अब दुकान संचालक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की तैयारी में जुटा है।
वर्जनयह गंभीर मामला है। बंद दुकान से लाखों रुपये की नशीली दवाओं का धंधा हो रहा है। अभी तो सिर्फ एक निर्माता से जानकारी मिली है। कई और सप्लायर ऐसे हो सकते हैं। इसका संचालक बिहार में है। उसके बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
-पूरन चंद, सहायक औषधि आयुक्त, गोरखपुर