07 फरिहा गांव में लाखों रुपये की लागत से बना पंचायत भवन खंडहर। संवाद
फरिहा। गांव में लाखों रुपये से बना पंचायत भवन आज खंडहर में तब्दील हो चुका है। 2009 में तैयार यह भवन आज तक उपयोग में नहीं आ सका। मरम्मत पर लाखों खर्च होने के बावजूद इसमें न तो कोई अधिकारी बैठा, न ही ग्राम पंचायत का कोई काम हुआ। निर्माण के समय अधिकारियों ने जल्दबाजी में पंचायत भवन तो बनवा दिया, लेकिन यह देखना भूल गए कि भवन किस जमीन पर बन रहा है। बाद में यह सामने आया कि भवन भूमिधारी जमीन पर बना है।
जमीन मालिक अब्दुल वली आदि ने इस पर न्यायालय में मुकदमा दायर कर दिया। परिणामस्वरूप, 16 साल से भवन विवाद में उलझा है और गांव के लोग आज भी बुनियादी प्रशासनिक सुविधाओं से वंचित हैं। बताते चलें कि दरवाजे, खिड़कियां और फर्श सहित सभी सुविधाओं से लैस यह सरकारी भवन अब जर्जर है। ग्रामीण हारून, अकबर, नन्नू और विनोद यादव आदि बताते हैं कि अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा पूरा गांव भुगत रहा है। करीब 15,000 की आबादी वाले इस गांव के लोग अपनी छोटी-बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए आज भी ब्लॉक और तहसील के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग किया कि पंचायत भवन से जुड़ा विवाद जल्द निस्तारित किया जाए।
ग्राम पंचायत अधिकारी अजीत सिंह ने बताया कि पंचायत भवन जिस गाटा संख्या पर बना है, वह अब्दुल वली आदि के नाम की भूमिधारी भूमि है। इसी को लेकर मामला न्यायालय में विचाराधीन है। जब तक फैसला नहीं आता, पंचायत भवन में किसी प्रकार का कार्य नहीं हो पा रहा है।