दिल्ली दंगों की साजिश के आरोपी जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को खारिज करते हुए मंगलवार को कहा कि जांच अधिकारी ने आरोपपत्र में काल्पनिक कहानियां लिखीं और उसे तड़का लगाया। उमर खालिद ने सवाल भी किया कि क्या चक्का जाम करने पर किसी के खिलाफ आतंक रोधी कानून यूएपीए लग सकता है।
कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष उमर खालिद की जमानत याचिका पर उसेके वकील ने पूरक आरोपपत्र का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस ने प्रत्येक आरोपी को एक ही रंग में दिखाना चाहा और इसे तड़का लगाया।
क्या व्हाट्सएप ग्रुप बनाना आतंकवाद
अदालत के समक्ष उमर खालिद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पायस ने पुलिस के आरोपों को खारिज कर दिया। इनमें पहला आरोप था कि शरजील इमाम ने उमर खालिद के निर्देश पर मुस्लिम छात्रों के लिए चार दिसंबर 2019 को एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था। उन्होंने इसे खारिज करते हुए पूछा कि क्या मुस्लिम छात्रों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाया आतंकवाद है।
पायस ने कहा कि किसी गवाह ने ये कहा कि ये ग्रुप उमर खालिद के निर्देश बनाया गया था। उमर खालिद और इमाम के बीच कोई संपर्क नहीं है। खालिद ने इस ग्रुप में कोई संदेश नहीं भेजा। केवल किसी ग्रुप में होना कोई अपराध नहीं है। ये सब अभियोजन की कल्पना की उपज है। अभियोजन ने प्रत्येक आरोपी को केवल एक रंग देना चाहा कि सभी इस साजिश का हिस्सा थे। इसके समर्थन में किसी गवाह का बयान नहीं है।
भड़काऊ भाषण के आरोप को नकारा
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने पुलिस के उस आरोप को भी खारिज कर दिया कि उमर खालिद ने सात दिसंबर 2019 को जंतर मंतर पर भड़काऊ भाषण दिया था। अभियोजन का ये भी आरोप था कि यहां उमर खालिद ने स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव को इमाम से मिलवाया था।
पुलिस ने योगेेंद्र यादव से इमाम को उसके सीनियर और मेंटर उमर खालिद ने मिलवाया था। सीनियर और मेंटर शब्दों से पुलिस ने आरोपपत्र में तड़का लगाया है। ये बेहद खतरनाक चीज है। उन्होंने कहा कि जो भाषण उमर खालिद ने दिया था लेकिन उसमें कहीं भी कुछ भी भड़काऊ नहीं है।
ऐसा भी कुछ नहीं कि उससे कोई भड़का हो।
उन्होंने कहा कि जांच अधिकारी कहानी सुनाना चाहता था लेकिन वह ये भूल गया कि यह कोई कहानी सुनाने वाला नहीं है, वह कानूनी कार्य कर रहा है। आरोपपत्र में लगाए गए प्रत्येक आरोप के समर्थन में कोई आधार होना चाहिए लेकिन इसका कोई आधार नहीं है। वह उमर को इसी रंग में दिखाना चाहते थे लेकिन उनके पास इसके लिए पर्याप्त सामग्री नहीं है।
गुप्त बैठक में शामिल होने का आरोप खारिज
पायस ने उस तीसरे आरोप को भी खारिज कर दिया कि उमर खालिद आठ दिसंबर 2019 को उस गुप्त बैठक में हिस्सा लिया जिसमें चक्का जाम करने पर चर्चा की गई। उन्होंने सवाल किया कि क्या चक्का जाम करने पर यूएपीए लगता है? किसी बैठक में ये चर्चा होना कि प्रदर्शन में चक्का जाम किया जाएगा, क्या इस पर भी यूएपीए लग सकता है? ये कहां कहा गया है कि ये अपराध है? इस बैठक को हर खबर में साजिश के तौर पर प्रसारित किया गया। उन्होंने तीन गवाहों के बयान पढ़े जिनमें से किसी ने भी इसे गुप्त बैठक नहीं कहा। इन बयानों पर दस्तखत भी नहीं हैं क्योंकि ये काफी देरी के बाद रिकार्ड किए गए।
पायस ने कहा कि अगर मैं मास्टरमाइंड हूं तो गवाह आपके अनुरूप क्यों नहीं बोल रहे? किसी ग्रुप का हिस्सा होना या किसी बैठक में शामिल होना किसी भी तरह अपराध नहीं है।अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए दो नवंबर की तारीख तय की है।