बांसी। हिन्दी दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय कवि संगम संगठन द्वारा कवि डाॅ. सुशील श्रीवास्तव “सागर” के आवास पर रविवार की रात काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें हिन्दी के महत्व के बारे में चर्चा हुई।डाॅ. सुशील श्रीवास्तव सागर ने वांणी वंदना के पश्चात गीत हिन्दी है जन-जन की भाषा हिन्दी है पहचान, हम सब हिन्दी भाषी हैं हम सबको है अभिमान। पढ़कर कार्यक्रम को दिशा प्रदान की जिसे ख़ूब सराहना मिली।
तत्पश्चात कवि ब्रम्ह देव शास्त्री पंकज की रचना जिस हिंदी ने अपना परचम दुनिया में लहराया है, उस हिंदी को अपने घर में मान नहीं मिल पाया है पढ़ी और ख़ूब तालियां बटोरी। फिर कवि कृष्ण कुमार मिश्र किशन ने पृष्ठ पर हिंदी सजेगी बूंद मसि का भार दो, है सरल लिखना इसे बस लेखनी में धार दो। पढ़कर माहौल को ख़ुशनुमा बनाया। कवि कुंज बिहारी कुंज ने अपनी रचना हिंदी में देश एवं ब्रम्हांड के सभी देवी देवताओं के नाम हैं, अन्तर मन से सोचिए कि अन्य भाषाओं का भारत में क्या काम है। पढ़कर सोचने को विवश किया। कवि किशन जी वर्मा किशन ने मौन ही मौन से बोलता रह गया दिल से अपना पता पूछता रह गया, तुमसे मैं जब मिला मिलके हम हो गया, ख़ुद ही ख़ुद में ख़ुदा ढूंढ़ता रह गया। पढ़कर आध्यात्मिक वातावरण उत्पन्न किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कवि डाॅ. ज्ञानेंद्र द्विवेदी दीपक और संचालन डाॅ. सुशील श्रीवास्तव सागर ने किया। इस अवसर पर राम शरण लाल श्रीवास्तव बाल जी श्रीवास्तव, भोला सिंह, दीप नरायन पांडेय ,दीप राम सरन श्रीवास्तव, दिनकर त्रिपाठी, सचिन, सुवर्णना श्रीवास्तव, डाॅ. अमिता श्रीवास्तव मौजूद रहे। संवादु