बढ़ापुर। गांव कुंजेटा में दंपती की जलकर माैत होने के बाद गमगीन परिजन बस यही बोले कि हम कहते थे कि बीड़ी से फेफड़े जलते हैं, लेकिन अब तो उनकी जिंदगी ही जल गई। बीड़ी की लत ही मां- बाऊजी को ले गई।
अस्सी साल के महावीर सिंह को डेढ़ महीना पहले लकवा हुआ और शरीर का आधा हिस्सा मोहताज हो गया। बिस्तर पर रहने के बाद भी बुजुर्ग बीड़ी की तलब को कम नहीं कर सकी। पहली मंजिल पर बने कमरे में बुजुर्ग महावीर सिंह का बिस्तर उनकी बीमार पत्नी गोमती देवी के पास लगा रहता था। गोमती देवी पिछले डेढ़ साल से लकवाग्रस्त होने के कारण बिस्तर पर थी। पुत्र रूप सिंह ने बताया कि उनके पिता का एक हाथ और एक पैर नहीं चलता था।
फिर भी दूसरे हाथ और दूसरे पैर के अंगूठे में माचिस दबाकर बीड़ी सुलगा लेते थे। अब बीड़ी सुलगाने के दौरान ही बिस्तर में आग लगने का अनुमान लगाया जा रहा है। बताया गया कि बुजुर्ग महिला की जीभ पर भी लकवे का असर था, जिसके चलते बोल भी नहीं पाती थी।
रात में बिस्तर से गिर गए थे महावीर सिंह : बताया गया कि रात में तीन बजे महावीर सिंह बिस्तर से नीचे गिर गए थे, इसके बाद बेटे रूप सिंह कश्यप ने उनके कमरे में जाकर पिता को फर्श से उठाकर बिस्तर पर लेटा दिया।
इसके बाद रूप सिंह नीचे आकर सो गया। इसके बाद चार बजे कमरे से धुंआ निकलता देखा गया। अनुमान है कि बिस्तर पर लेटने के कुछ देर बाद ही बुजुर्ग ने बीड़ी सुलगाई होगी।
लकवा रोग के कारण शोर न मचा सका दंपती
उधर परिजनों व ग्रामीणों का मानना हैं कि लकवा रोग से ग्रस्त होने के कारण दंपती शोर भी नहीं मचा सके। उनकी चीख कमरे में ही कैद होकर रह गई। सूचना मिलने पर थाना प्रभारी निरीक्षक मृदुल कुमार मौके पर पहुंचे और घटना की जांच पड़ताल की। परिवार वाले वृद्ध दंपती का पोस्टमार्टम कराने के पक्ष में नहीं थे। बाद में पुलिस के समझाने पर पोस्टमार्टम कराने के लिए राजी हुए।