उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज दुनिया जिस गति से बदल रही है, वह औद्योगिक क्रांतियों से कहीं अधिक तेज है। इस समय भारत वैश्विक अवसर और विकास का केंद्र बन चुका है। जब विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं कठिनाइयों का सामना कर रही हैं, तब भी हमने अपनी प्रगति की दिशा को बनाए रखा है
हमारे देश को पहलगाम में चुनौती दी गई है। इस समय हमारे पास सबसे बड़ा आश्वासन हमारी दूरदर्शी नेतृत्व क्षमता है, लेकिन हमें भारतवासियों के रूप में एकजुट होकर खड़ा होना होगा। भारत के भीतर और बाहर जो देशविरोधी शक्तियां हैं, उन्हें निष्क्रिय करना आवश्यक है। ऐसे समय में हमें अपने मूल अधिकारों को अपने मूल कर्तव्यों से नीचे रखना चाहिए। यह बातें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने बिमटेक के 37वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में वर्चुअल माध्यम से कहीं।
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उन्होंने कहा कि आज दुनिया जिस गति से बदल रही है, वह औद्योगिक क्रांतियों से कहीं अधिक तेज है। इस समय भारत वैश्विक अवसर और विकास का केंद्र बन चुका है। जब विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं कठिनाइयों का सामना कर रही हैं, तब भी हमने अपनी प्रगति की दिशा को बनाए रखा है और फ्रैजाइल फाइव से निकलकर विश्व की पांच सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गए हैं। आइए हम यह संकल्प लें कि हम उन सभी कमियों को दूर करने की दिशा में कार्य करें और लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोच्च प्रतिबद्धता के साथ पोषित कर अपने लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाएं।
गवर्निंग बोर्ड की अध्यक्षा जयश्री मोहता ने बताया कि दीक्षांत समारोह में पीजीडीएम, पीजीडीएम (रिटेल मैनेजमेंट), पीजीडीएम (इंश्योरेंस बिजनेस मैनेजमेंट), पीजीडीएम (इंटरनेशनल बिजनेस), पीजीडीएम (ऑनलाइन) और फैलोशिप प्रोग्राम के छात्रों को डिग्री दी गईं। इस वर्ष कुल 713 विद्यार्थियों ने स्नातक की उपाधि प्राप्त की। 18 विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए पदक और प्रमाणपत्रों से सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि यह मजबूत संकल्प, सीखने और आत्म-परिवर्तन का उत्सव है। बिमटेक की निदेशक डॉ. प्रवीणा राजीव ने कहा, जैसे ही आप इस संस्था के द्वार पार करते हैं, अपने साथ ईमानदारी, सतत नवाचार और समावेशिता के मूल्य लेकर जाएं। इस मौके पर नंद गोपाल खैतान, विकास कंदोई भी उपस्थित रहे।