- यूपीसीडा की अनदेखी से परेशान हैं औद्योगिक सेक्टर साइट-बी के उद्यमी, बोले वर्षों से की जा रही पुल की मांग
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। कहने को तो साइट-बी एक औद्योगिक सेक्टर हैं लेकिन नाले ने सेक्टर को दो भाग में बांट दिया है। नाले की वजह से सेक्टर के ब्लॉक भी दो भाग में बंटे हैं। इसका नुकसान उद्यमियों को उठाना पड़ रहा है। एक भाग से दूसरे तक पहुंचने के लिए करीब 5 किमी का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है। श्रमिक भी दूसरे हिस्सा में जाने से बचते है। उद्यमियों ने यूपीसीडा से बार-बार नाले के ऊपर पुल बनाकर नया रास्ता बनाने की मांग की, लेकिन उसकी लगातार अनदेखी हो रही है।
बुधवार को सूरजपुर औद्योगिक सेक्टर साइट बी स्थित आईईए कार्यालय में आयेाजित अमर उजाला संवाद में सेक्टर के उद्यमियों ने अपनी समस्याएं बताईं। उद्यमियों ने बताया कि सेक्टर में 1000 से अधिक औद्योगिक इकाइयां हैं। वर्ष 1985 में सेक्टर का आवंटन किया गया था। तब से अब तक सीवर लाइन नहीं डाली गई है। उद्यमी टैंकर की मदद से सीवर को खाली कराते हैं। वहीं सेक्टर के बीच से हवालिया नाला निकल रहा है। जो बदबू का कारण बना हुआ है। साथ ही सेक्टर को दो भाग में बांटा हुआ है। नाले पर पुल बनाने की मांग की जा रही है लेकिन यूपीसीडा कोई सुनवाई नहीं कर रहा है। अब तक पानी का कनेक्शन नहीं है। ड्रेनेज सिस्टम नहीं है। 20 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मेंटेनेंस शुल्क दिया जाता है लेकिन सुविधाएं नाममात्र की भी नहीं है। स्ट्रीट लाइट लगी है लेकिन जलती नहीं है। अतिक्रमण की समस्या बढ़ती जा रही है। पार्कों का हाल बेहाल है। रखरखाव नहीं किया गया है। कुछ को विकसित ही नहीं किया गया है। औद्योगिक सेक्टरों में दमकल की गाड़ियों में पानी भरने की व्यवस्था होनी चाहिए। अभी गाड़ियों को काफी दूर जाना पड़ता है।
कोट
40 से अधिक साल बीत चुके हैं लेकिन सेक्टर में पानी की आपूर्ति नहीं है। उद्यमी भूजल पर निर्भर है। कंपनी से पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं है। -
महिपाल सिंह
सेक्टर में अतिक्रमण की समस्या बढ़ रही है। जो बढ़ती चोरी का भी कारण है। बार-बार यूपीसीडा से शिकायत की जा रही है लेकिन समाधान नहीं निकल रहा।
दिनेश चौहान
2000 से छोटे औद्योगिक सेक्टरों का आवंटन ई-लॉटरी से बंद होना चाहिए। अगर यह बंद नहीं होगा तो उद्यमी यहां से पलायन करने लगेंगे। -
पीके तिवारी
नाले के कारण सेक्टर दो भाग में बंट गया है। एक तरफ से दूसरी तरफ आने-जाने के लिए 5 किमी का चक्कर लगाना पड़ता है। एक हिस्से में श्रमिक भी नहीं जाते है। -
पीएस मुखर्जी
सेक्टर में पार्कों को विकसित नहीं किया गया है। ड्रेनेज सिस्टम भी नहीं है। स्ट्रीट लाइट लगी हैं पर जलती नहीं। आग बुझाने के पुख्ता इंतजाम नहीं है। -
पवन गर्ग
सेक्टर में सीवर लाइन नहीं है। उद्यमियों को टैंकर की मदद से सीवर टैंक खाली कराने पड़ रहे हैं। इसकी बार-बार मांग की गई पर आज तक कुछ नहीं हुआ।-
एमपी शुक्ला