जिले में दिवाली के दो दिन पहले से ही हवा की सेहत खराब है। जिले में 18 अक्तूबर से ही एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 150 के ऊपर है।
जिले में धनतेरस के एक दिन पहले से ही एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) में 15 से 20 अंक तक इजाफा देखा जा रहा है। दिवाली के तीन दिन बाद भी जिले की एक्यूआई 161 पर है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, सामान्य एक्यूआई 50 से 100 के बीच होना चाहिए। जिले में औसत एक्यूआई 135-140 के आसपास होती है।
जिले में दिवाली के बाद से ही धुंध दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि धुंध दिवाली के बाद बिगड़ी एक्यूआई का असर है। सामान्य तौर पर 50 से 100 तक की एक्यूआई स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं है लेकिन 100 से 150 के ऊपर तक की एक्यूआई स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। दिवाली पर आतिशबाजी का असर पर्यावरण पर भी पड़ता है।
वातारण की गुणवत्ता बताने वाले आईक्यूएयर पोर्टल के अनुसार, जिले में बीते पांच दिनों से एक्यूआई 150 से अधिक है। धुंध का असर धीरे-धीरे कम होगा। एक्यूआई अधिक होने से दमा, अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ गई। गोपीगंज अर्बन पीएचसी के प्रभारी अखिलेश सिंह ने बताया कि जिले के अस्पतालों में दो दिनों में 150 से अधिक दमा के मरीज पहुंचे।
पटाखों को जलाने से सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन मोना ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाई ऑक्साइड के साथ ही वायु में सूक्ष्म कण (पीएम 2.5 एवं पीएम 10) और भारी धातुएं कैडिमियम, एल्युमिनियम का भी उत्सर्जन होता है। इनसे हवा की गुणवत्ता खराब होती है और वायुमंडल धुंधला हो जाता है। बताया कि हवा में जहरीली गैसों के घुलने से आंख में जलन, सांस लेेने में परेशानी, फेफड़े में संक्रमण, घबराहट, सिरदर्द, तनाव, चिड़चिड़ापन और त्वचा संंबंधी समस्या भी बढ़ती है।