लखीमपुर खीरी। आगामी गर्मी के सीजन में इस बार विद्युत फॉल्टों से राहत मिलेगी। तार जलने व ट्रांसफाॅर्मर फुंकने से अब तक सबसे ज्यादा फॉल्ट होते हैं। रीवैंप योजना के तहत तार तो बदले जा चुके हैं। अब बिजनेस प्लान के तहत ट्रांसफाॅर्मरों की क्षमता वृद्धि की जाएगी। बिजनेस प्लान के कार्यों को शासन ने स्वीकृत दे दी है।
विद्युत के मामले में जनपद दो सर्किल व छह डिविजन में बंटा है। लखीमपुर सर्किल में निघासन, मितौली व लखीमपुर डिविजन हैं, जबकि गोला सर्किल में पलिया, मोहम्मदी व गोला डिविजन आते हैं। जिले में करीब साढ़े छह लाख से अधिक विद्युत उपभोक्ता हैं। विद्युत आपूर्ति के लिए जिले में 52 हजार से अधिक ट्रांसफॉर्मर लगे हैं। ट्रांसफाॅर्मर मौजूदा वक्त के लोड के अनुसार लगाए गए थे, लेकिन पिछले कई सालों से लोड बढ़ता जा रहा है। इससे आए दिन ट्रांसफाॅर्मर फुंकते हैं। इससे उपभोक्ताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
लखीमपुर सर्किल के अधीक्षण अभियंता धमेंद्र सिंह ने बताया कि उनके सर्किल के ट्रांसफाॅर्मरों की क्षमता बढ़ाने सहित अन्य कार्यों के लिए बिजनेस प्लान शासन को भेजा था, जिसको मंजूरी मिल चुकी है। काम कराने वाली फर्म का 48 लाख का टेंडर भी हो चुका है।
जनपद के अलग-अलग क्षेत्रों में 25 केवीए, 63 केवीए, 100 केवीए, 250 केवीए और 400 केवीए के ट्रांसफॉर्मर लगे है। भीषण गर्मी में सबसे ज्यादा 250 और 400 केवीए के ट्रांसफॉर्मर फुंके हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा इन्हीं ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई जाएगी। 250 वाले 400 केवीए के किए जांएगे। 100 वाले की 200 केवीए की क्षमता बढ़ाई जाएगी।
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भीषण गर्मी में प्रतिदिन औसतन फुंके 16 ट्रांसफाॅर्मर
गर्मी के सीजन में विद्युत लोड बढ़ने से प्रतिदिन औसतन 16 ट्रांसफाॅर्मर फुंके थे। विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो भीषण गर्मी के दौरान 60 दिनों में 955 ट्रांसफॉर्मर फुंके थे, जिसमें सबसे ज्यादा मई में 652 और अप्रैल मेंं 303 हैं। इधर, गर्मी में फुंकने वाले ट्रांसफॉर्मर मरम्मत के लिए जिले में दो वर्कशॉप लखीमपुर और बांकेगंज में हैं। लखीमपुर में गढ़ी उपकेंद्र के पास वर्कशॉप है, जहां 100 केवीए से नीचे के ट्रांसफॉर्मरों की मरम्मत की जाती है। बांकेगंज में स्थित वर्कशॉप में 100 केवीए के ऊपर वाले ट्राॅसफाॅर्मरों की मरम्मत होती है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में बदलने में लगते हैं कई दिन
शहर में ट्रांसफॉर्मर फुंकने के कुछ देर बाद मोबाइल ट्राॅली ट्रांसफॉर्मर लगा दिए जाते हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रांसफाॅर्मर फुंकने के बाद जल्द बदल पाना संभव नहीं है। गांवों में ट्राॅली ट्रांसफॉर्मर की व्यवस्था नहीं हो पाती और नया ट्रांसफाॅर्मर आने कई दिन लग जाते हैं, तब तक उपभोक्ताओं को गर्मी की मार झेलनी पड़ती है।
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